शनिवार, 17 जुलाई 2010

लो जी मैंने भी प्रेम विवाह कर ही लिया

यारो बड़े दिन हो गए कुछ भी नहीं लिखा , कोई बात नहीं निकली मन से , कोई हँसी नहीं आई , कोई मजा नहीं लिया , किसी लड़की को पटाने का कोई तरीका भी नहीं लिखा , किसी को कुछ भी नहीं किया , 
अब  ये तो बता दू मैंने एस्सा क्यों किया , 
अब  क्या बताये भाई , लड़की पटाने का तरीका बताते बताते हम ने भी एक छोरी पसंद कर ली और अपने तरीको में से कुछ बाण उस पर चला दिए , अब क्या करू भयो ,मै तो फसगयो भाई , मेरे को उससे घना ही प्यार हो गयो , फिर के था , घर मे जब बताया तो पहली बार पता चलो की भूकंप किसी कहवे है , क्या क्या गली पड़ी , वाह मजा ही आ गयो . अब उस के घर की बात लोजी , वह का हाल भी यही था , शायद दोनों के घर वाले यो न समझ पायो की अरे तुम ने इन्हें डाक्टरी पड़वा दी ,तो बाल्कन को क्या अपने अछे बुरे की समझ न आवेगी , पर नहीं हिटलर फिर जिन्दा हो गया , कोई बात न , हम भी लगे रहे अपने काम में और २ दिन में ही सारा इंतजाम कर के शादी कर ही ली ,इस विवाह में हमारा साथ दिया हमारे ५ परम मित्रों ने ,
आज एक हरयान्वी भाई से मुलाकात हुई थी , तो मैंने सोचा क्यों न कुछ कुछ इस मीठी सी भाषा में लिख दू , कैसी लगी महारी हरयान्वी , अभी नयो नयो हू , कही न कही गलती हो गयी हो तो , उसे मत सोच्यो

2 टिप्‍पणियां:

  1. अमित भाई आप लिख रहे हैं कि मैं तो फस गयो। लेकिन मुझे तो यहाँ बालिका फसी हुई दिखायी दे रही है। शादी की शुभकामनाएं।

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