शनिवार, 31 जुलाई 2010

नहीं पता था जानू तुम इतनी जल्दी बदल जाओगे

सोचा था आप की बाहों में सोयेगे , मगर तकिये से काम चलाना पद्फ्ता है ,मुआ ये  pc  न हुआ मेरी सोतन हो गया , और ये तुमहरा  ब्लॉग , तो मेरी जान का दुश्मन हो गया है ,क्यों चिपके रहते हो इस से सारे दिन , पहले कहते थे , मै हू और तुम हो , अब तो ये  pc  रह गया हम बिन , आज इस डिब्बे को गुल न किया तो मेरी २ साडी की जगह एक ही धो देना , 


अरे  अरे भाई डरो मत , अब मै रोज यही सुनता हू , आप भी बताओ क्या ये आप के साथ भी होता है , और इस से बचने का तरीका जरूर बताना

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें