शनिवार, 17 जुलाई 2010

अरे आज मेरा ब्लॉग मेरी ताजी ताजी बीवी ने पढ़ लिया

अब अपने दिलके उप्पर क्या क्या बिता क्या क्या बताऊ भयो , आज सुबह सुबह मेरा  pc  महाराज खुले रह गए और मेरी किस्मत ही खराब थी की मेरा ब्लोग भी खुला रह गया  था ,कल रत ही अपने मन की भाडास ब्लॉग पर लिख मरी थी , वो उस के हाथो पड गई , यार सुबह से चाय पानी तो दूर की कोड़ी नजर आ रही है , उस ने बात भी बंद कर दी है , और मै एक याचिकाकरता की तरह उस के समक्ष नतमस्तक मुद्रा में सुबह से खड़ा हू , कोई भगवन से प्राथना करो की वो कम से कम एक कप चाय (ठंडी भी चलेगी ) देने की किरपा करे , यार बड़ा मन जलता है जब वो मुझे चिडा चिडा कर चाय के साथ बिस्कुट खा रही है   ,

बाकि शाम को ................

2 टिप्‍पणियां:

  1. अभी तो ताजी - ताजी है जरा सम्भाल के , और बाद में देखना

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  2. ताजी-ताजी है
    इसलिये इतना चिढा रही हैं जी
    मान-मनौव्वल, उनका अधिकार भी है और जरूरत भी
    और अब तो आपको उनसे कुछ भी छुपाना नहीं चाहिये,
    हां ब्लाग भी

    प्रणाम

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