रविवार, 15 अगस्त 2010

आशिक की जबानी -२

गम की एक काली घटा ,
खुशियों के सूरज पर भारी होती है ,
अपनों की एक चोट ,
गैरो के हर सितम से करारी होती है .............................

आशिक की जबानी -१

सूरज ने इतना न कभी जलाया ,
जितना चांदनी ने जलाया है ,
ओरो ने इतना गम नहीं दिया है कभी ,
जितना अपनों ने रुलाया है .........................................