बुधवार, 29 सितंबर 2010

रविवार, 26 सितंबर 2010

मजिस्ट्रेट की पारखी निगाह का क्या कहना ?

'क्या बात है, बहुत परेशान नजर आ रहे हो?'
'क्या बताऊं, कुछ दिन पहले मैंने गलती से युवती का हाथ पकड़ लिया था। उसने शोर मचा दिया। आज अदालत में पेश हुआ तो मैंने अपनी गलती मान ली। इस पर मजिस्ट्रेट ने 500 रुपए जुर्माना कर दिया।'
'तुम्हें किए की सजा मिलनी ही चाहिए थी।'
'हां, लेकिन उसके फौरन बाद वह लड़की अदालत में हाजिर हो गई। मजिस्ट्रेट ने उसे देखकर मुझ पर 500 रुपए का एक और जुर्माना कर दिया कि तुम जरूर नशे में थे।'

रविवार, 19 सितंबर 2010

कैसे छुपाएं ऑफिस का रोमांस

आपका अपने ऑफिस में किसी के साथ चक्कर चल रहा है, परन्तु डरते हैं कि आपकी कहीं जाब न चली जाए? लेकिन चिंता की कोई बात नहीं अब आप कुछ टिप्स का पालन करके अपनी इस दिक्कत से निजात पा सकते हैं.

Lifestyle Blogअपनी दिनचर्या को ना बदलें

अपना ऑफिस रोमांस छुपाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपनी दिनचर्या में कुछ भी बदलाव ना लाएं. “कुछ भी बदलना नहीं चाहिए”. क्योंकि लोग हमेशा कुछ भी महत्वपूर्ण परिवर्तन को महसूस कर लेते हैं, खासकर वह लोग जो अफवाहें फैलाते हैं अतः साधारण से बाहर कुछ भी करने से बचें. इसका अर्थ यह भी है कि अपने नए साथी के साथ लंच में ना जाएं और विशेष रूप से तब जब आप इससे पहले अपने साथी के साथ कभी भी बाहर नहीं गए हों.

किसी को ना बताएं

आप जहाँ काम करते हैं वहॉ आपके कुछ खास दोस्त होंगे जिनको आप अपनी सभी बातें बताते होंगे खासकर अपने नए रिश्ते के बारे में परन्तु अगर आप अपना नया रिश्ता छिपाना चाहते हैं तो एक महत्वपूर्ण बात जान लें कि अपने रिश्ते के बारे में किसी को ना बताएं. हाँ आप किसी को बताना चाहते हैं तो आप अपने घर वालों को और उन लोगों को बता सकते हैं जो आपके साथ काम नहीं करते.

Metro Lifeसंवादों से बचें

अगर आप ऑफिस कार्य के समय अपने साथी के साथ संवाद करना चाहते हैं लेकिन डरते हैं कि यह बात किसी को पता ना चल जाए तो कृपया अपने ऑफिस के मेल का प्रयोग ना करें. इसके लिए आप अपने निज़ी मेल आईडी का प्रयोग कर सकते हैं. यह इसलिए भी ज़रुरी है क्योंकि बहुत से ऑफिस के अपने निज़ी सर्वर्स होते हैं और अगर आईटी विभाग के किसी भी व्यक्ति ने इसे देख लिया तो आप के लिए मुसीबत हो सकती हैं.

इसके अलावा अपने आपको मोबाइल फोन और वॉइस मेल का प्रयोग करने से रोकें क्योंकि इसके द्वारा आप अपने साथियों की नज़र में आ सकते हैं.

कार्यालय के सामाजिक सम्मेलनों में एक साथ भाग ना लें

एक समस्या जो ऑफिस की क्रिसमस पार्टी और स्थानीय बार की पार्टी के साथ जुड़ी है वह “शराब और गपशप” क्योंकि जहाँ शराब होगी वहाँ गपशप ज़रूर होगी. अधिकतर ऐसे सम्मेलनों में ज्यादातर यह देखा गया है कि लोग आपसे कुछ पूछते हैं और आप उसका उत्तर भी देते हैं परन्तु लोग उसका मतलब कुछ और निकालते हैं.

Office Gossipsआपके कार्य में कोई फर्क न आए

आप अपने साथी को एक अच्छा सा प्यार भरा एसएमएस ज़रूर भेजें पर ध्यान दें कि इससे आपका कार्य ना प्रभावित हो मतलब पहले ऑफिस का कार्य फिर दूसरे कार्य के बारे में सोचें. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो इससे आपका कार्य अधूरा रह जाएगा जिसके कारण शायद आपका भविष्य प्रभावित हो सकता है. अगर आप कुछ कर सकते हैं तो ज़्यादा मेहनत करें जिससे शायद आपकी तरक्की हो.

9 से 5 के बीच का प्यार

एक समय था जब ऑफिस रोमांस को निषेध की वस्तु के तौर पर देखा जाता था परन्तु आजकल ऑफिस रोमांस आम होता जा रहा है. लेकिन इसके बावजूद भी ऑफिस में बहुत सी ऐसी चीजें हैं जिससे आप परहेज़ रखें और ऑफिस में इश्क लड़ाना इसके अंतर्गत आता है. अगर आप इससे बचना चाहते हैं तो यह ज़रुरी हो जाता है कि आप सावधानी
रखें.

शुक्रवार, 17 सितंबर 2010

संदेशे आते हैं, हमें फुसलाते हैं!

एक जमाने में ईश्वर से जो चीज़ें मांगा करता था, आज वो सब मेरी चौखट पर लाइन लगाए खड़ी हैं। कभी मेल तो कभी एसएमएस
से दिन में ऐसे सैंकड़ों सुहावने प्रस्ताव मिलते हैं। लगता है कि ईश्वर ने मेरा केस मोबाइल और इंटरनेट कंपनियों को हैंडओवर कर दिया है। पैन कार्ड बनवाने से लेकर, मुफ्त पैन पीत्सा खाने तक के न जाने कितने ही ऑफर हर पल मेरे मोबाइल पर दस्तक देते हैं! इन कंपनियों को दिन-रात बस यही चिंता खाए जाती है कि कैसे मेरा  भला किया जाए?

कुछ समय पहले ही किन्हीं पीटर फूलन ने मेल से सूचित किया कि मेरा ईमेल आईडी दो लाख डॉलर के इनाम के लिए चुना गया है। हफ्ते भर में पैसा अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। सिर्फ दो हज़ार डॉलर की मामूली प्रोसेसिंग फीस जमा करवा मैं ये रक़म पा सकता हूं। ये जान मैं बेहद उत्साहित हो गया। कई दिनों से न नहाने के चलते बंद हो चुका मेरा रोम-रोम, इस मेल से खिल उठा। इलाके की सभी कोयलें कोरस में खुशी के गीत गाने लगीं, मोर बैले डांस करने लगे। मैं समझ गया कि मेरी हालत देख माता रानी ने स्टिमुलस पैकेज जारी किया है।

पहली फुर्सत में मैंने ये बात बीवी को बताई। मगर खुश होने के बजाए वो सिर पकड़कर बैठ गई। फिर बोली...मैं न कहती थी आपसे कि अब भी वक़्त है... संभल जाओ....मगर आप नहीं माने...अब तो आपकी मूर्खता को भुनाने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशें भी शुरू हो गई हैं।

मैंने वजह पूछी तो वो और भी नाराज़ हो गईं। कहने लगी कि आज के ज़माने में दुकानदार तक तो बिना मांगे आटे की थैली के साथ मिलने वाली मुफ्त साबुनदानी नहीं देता और आप कहते हैं कि किसी ने आपका ई-मेल आईडी सलेक्ट कर आपकी दो लाख डॉलर की लॉटरी निकाली है! हाय रे मेरा अंदाज़ा...आपकी जिस मासूमियत पर फिदा हो मैंने आपसे शादी की थी, मुझे क्या पता था कि वो नेकदिली से न उपज, आपकी मूर्खता से उपजी है!

दोस्तों, एक तरफ बीवी शादी करने का अफसोस जताती है तो दूसरी तरफ हर छठे सेकंड मोबाइल पर शादी करने के प्रस्ताव आते हैं। बताया जाता है कि मेरे लिए सुंदर ब्राह्मण, कायस्थ, खत्री जैसी चाहिए, वैसी लड़की ढूंढ ली गई है। बंदी अच्छी दिखती है और उससे भी अच्छा कमाती है। सेल के आख़िरी दिनों की तरह चेताया जाता है कि देर न करूं। मगर मैं बिना देर किए मेसेज डिलीट कर देता हूं। ये सोच कर ही सहम जाता हूं कि बिना ये देखे कि मेसेज कहां से आया है, अगर बीवी ने उसे पढ़ लिया तो क्या होगा?

और जैसे ये संदेश अपनेआप में तलाक के लिए काफी न हों, अब तो सुंदर और सेक्सी लड़कियों के नाम और नम्बर सहित मेसेज भी आने लगे हैं। कहा जा रहा है कि मैं जिससे,जितनी और जैसी चाहूं, बात कर सकता हूं। बिना ये समझाए कि सुंदर और सेक्सी लड़की के लालच का भला फोन पर बात करने से क्या ताल्लुक है। साथ ही मुझे बिकीनी मॉडल्स के वॉलपेपर मुफ्त में डाउनलोड करने का अभूतपूर्व मौका भी दिया जाता है। मानो, इस ब्रह्माण्ड में जितने और जैसे ज़रूरी काम बचे थे, वो सब मैंने कर लिए हैं, बस यही एक बाकी रह गया है!

दोस्तों, ऐसा नहीं है कि ये लोग मेरा घर उजाड़ना चाहते हैं। इन बेचारों को तो मेरे घर बनाने की भी बहुत फिक्र है। नोएडा से लेकर गाज़ियाबाद और गुडगांव से लेकर मानेसर तक का हर बिल्डर मैसेज कर निवेदन कर कर रहा है कि सिर्फ मेरे लिए आख़िर कुछ फ्लैट बाकी हैं। ये सोच कभी-कभी खुशी होती है कि इतने बड़े शहर में आज इतनी इज्ज़त कमा ली है कि बड़े-बड़े बिल्डर पिछले एक साल से सिर्फ मेरे लिए आख़िर के कुछ फ्लैट खाली रखे हुए हैं।

पिछली दिवाली पर शुरू किए सीमित अवधि के डिस्काउंट को सिर्फ मेरे लिए खींचतान कर वो इस दिवाली तक ले आए हैं। उनके इस प्यार और आग्रह पर कभी-कभी आंखें भर आती हैं। मगर मकान भरी आंखों से नहीं, भरी जेब से खरीदा जाता है। मैं खाली जेब के हाथों मजबूर हूं और वो मेरा भला चाहने की अपनी आदत के हाथों।

वो संदेश भेज रहे हैं और मैं अफसोस कर रहा हूं। मकान से लेकर जैसी टीवी पर देखी, वैसी सोना बेल्ट खरीदने के एक-से-एक धमाकेदार ऑफर हर पल मिल रहे हैं। कभी-कभी सोचता हूं कि सतयुग में अच्छा संदेश सुन राजा अशर्फियां लुटाया करते थे, ख़ुदा न ख़ास्ता अगर उस ज़माने में वो मोबाइल यूज़ करते, तो उनका क्या हश्र होता!

बुधवार, 8 सितंबर 2010

मेरी मौत का आखरी पैगाम---------

युवक आखिरी सांसें ले रहा था। उसने अपने छोटे भाई से चिट्ठी लिखवाई और बोला , ' यह खत उमा को दे देना। ' चिट्ठी में लिखा था : ' आखिरी वक्त में भी मुझे तुम्हारी याद आती रही। '
फिर करवट बदलकर बोला : ' इसकी एक कॉपी मोनिका , रजनी , नीरू , कविता , बबिता ,रेशमा , नसरीन , रश्मि , पूजा , सोनू , सखी ,शालू,  मीनू और रोजी को भी भेज देना।

पति और पत्नी लिवर और किडनी

पति और पत्नी लिवर और किडनी की तरह होते हैं।
पति लिवर और पत्नी किडनी जैसी।
अगर लिवर फेल हो जाए तो किडनी भी बेकार हो जाती है।
लेकिन अगर किडनी फेल हो जाए तो लिवर दूसरी किडनी से काम चला लेता है।

रविवार, 5 सितंबर 2010

कारोबार बदलना हो तो क्या करे ?

Closing or Changing a Business
Closing or Changing a Business
किसी व्‍यवसाय किस्‍म को परिवर्तित करना
कंपनी व्‍यवसाय के प्रयोजनार्थ निर्मित एक स्‍वैच्छिक व्‍यक्ति संघ है जिसका एक सुभिन्‍न नाम तथा सीमित देयता है। यह न्‍यायिक व्‍यक्ति है जिसका उन सदस्‍यों से पृथक विधिक अस्तित्‍व हैं जो इसका संघटन करते हैं, वह अपने स्‍वयं के अधिकारों तथा कत्तव्‍यों के लिए सक्षम है तथा उसके पास निरंतर अनुक्रमण की संभाव्‍यता है।
भारत में, कंपनी अधिनियम, 1956 , में कंपनी के गठन, निदेशकों एवं प्रबंधकों की शक्तियों एवं उत्‍तरदायित्‍वों, पूंजी जुटाने, कंपनी की बैठकों का आयोजन करने, कंपनी लेखों के अनुरक्षण तथा लेखा-परीक्षा कंपनी के कार्यों के निरीक्षण की तथा जांच पड़ताल की शक्तियों तथा कंपनियों के अन्‍य कार्यकलापों के लिए प्रावधान किया गया है। यह अधिनियम सूंपर्ण भारत पर तथा सभी प्रकार की कंपनियों पर प्रयोज्‍य हैं चाहे वे इस अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत हो या किसी पूर्ववर्ती अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत हो।
कंपनी अधिनियम को कंपनी कार्य मंत्रालय तथा कंपनी रजिस्‍टार के कार्यालयों , सरकारी परिसमापकों , सरकारी न्‍यासी, कंपनी विधि बोर्ड , निरीक्षण निदेशक इत्‍यादि के माध्‍यम से केंद्रीय सरकार द्वारा प्रशासित किया जाता है। कंपनी रजिस्‍टार नई कंपनियों के निगमन तथा चल रही कंपनियों के प्रशासन के कार्य को नियंत्रित करता है। कंपनी अधिनियम के अंतर्गत, उद्यमी दो प्रकार की कंपनियों का निर्माण कर सकता है नामत: एक निजी कंपनी अथवा एक सरकारी कंपनी।
निजी कंपनी वह कंपनी है जिसके अनुच्‍छेदों के निम्‍नलिखित प्रतिबंध निहित हैं :-
  • अंशपूंजी को ऐसी राशि तक प्रतिबंधित किया जाए जो निर्धारित की गई है किन्‍तु जो एक लाख रुपए से कम नहीं होगी;
  • अपने शेयरों को अंतरित करने के सदस्‍यों के अधिकारों को, यदि कोई हैं, पतिबंधित करें;
  • कंपनी के विगत या वर्तमान कर्मचारियों को छोड़कर जो कंपनी के सदस्‍य हैं, इसके सदस्‍यों की संख्‍या को पचास तक सीमित करें;
  • कंपनी के किन्‍हीं शेयरों या ऋणपत्रों में अभिदान करने के लिए जनता को किसी आमंत्रण को प्रतिसिद्ध करें;
  • अपने सदस्‍यों, निदेशकों या उनके संबंधियों को छोड़कर किन्‍हीं अन्‍य व्‍यक्तियों से जमाराशियां आमंत्रित अथवा स्‍वीकार न करे।
साथ ही, निजी कंपनियों में सदस्‍यों की न्‍यूनतम संख्‍या दो है तथा ऐसी कंपनी के नाम के अंतिम भाग में 'प्रा. लि.' शब्‍द लगाए जाएगें।
कंपनी अधिनियम में यथा परिभाषित सार्वजनिक कंपनी की निम्‍न विशिष्‍टताएं हैं :-
  • इसके शेयर मुक्‍त रूप से अंतरणीय हैं;
  • इसकी सदस्‍यता की कोई उच्‍चतम सीमा नहीं हैं;
  • यह आम जनता को अपने शेयरों में अभिदान करने के लिए आमंत्रित कर सकती हैं;
  • इसकी न्‍यूनतम प्रदत्‍त पूंजी 5 लाख रुपए की या ऐसी उच्‍चतर प्रदत्‍त पूंजी है जो निर्धारित की जाए;
  • यह एक निजी कंपनी है जो किसी सरकारी (सार्वजनिक) कंपनी की सहायक कंपनी है।
साथ ही सार्वजनिक कंपनी में सदस्‍यों की न्‍यूनतम संख्‍या सात है तथा ऐसी कंपनी के नाम के अंतिम भाग में 'लिमिटेड' शब्‍द लगाया जाएगा। कंपनी के गठन के पश्‍चात, उद्यमी अपने व्‍यवसाय संगठन की किस्‍म को सार्वजनिक से निजी में या विपर्ययेन बदल सकता है। कंपनी अधिनियम में भी ऐसे रूपांतरणों के लिए प्रावधान निहित हैं।
  Business निजी कंपनी को सार्वजनिक कंपनी में रूपांतरित करना
  Business सार्वजनिक कंपनी को निजी कंपनी में रूपांतरित करना
     

नाबालिग बेटी को छेड़ते देखा तो मार डाला

नव भारत times में आज खबर क्या आप को कुछ सोचने पर मजबूर नहीं कर रही , , क्या आप भी अपनी बहन बेटी के साथ इस तरह का सलूक करने वाले का यही हश्र करना चाहते है , और करना भी चाहए

शुक्रवार, 3 सितंबर 2010

हेल्पलाइन – एक ब्लॉग पर सारी जानकारियां

 अमित जैन आपके लिए लाया है एक ऐसा पन्ना जहां आपको हर तरह की जानकारी एक क्लिक पर मिल जाएगी। पासपोर्ट के लिए अप्लाइ करना हो या बर्थ सर्टिफिकेट बनवाना हो या क्रेडिट कार्ड के फ्रॉड की शिकायत करनी हो, हर जानकारी का सोर्स है यहां। आपको साइट-दर-साइट भटकने की या सर्च करने की ज़रूरत नहीं है। । यह लिस्ट दिन-ब-दिन बढ़ती रहेगी

ड़े वक्त में काम आने वाले नंबर


टैक्स


अपना कारोबार


कैसे और कहां अप्लाइ करें?


कैसे/कहां शिकायत करें


कैसे रजिस्टर कराएं?


कैसे जांचें/पता करें?


कैसे बुक/जमा करें?


कैसे पाएं?


विभिन्न राज्यों की पुलिस वेबसाइट

गुरुवार, 2 सितंबर 2010

पेट्रोल पंप का पंगा

मिंटो रोड पर रहने वाले सतेंद्र शर्मा अपनी नई गाड़ी लेकर कनॉट प्लेस के पेट्रोल पंप पहुंचे। उन्होंने टैंक फुल करने को कहा और मीटर के हिसाब
से 40 लीटर पेट्रोल के पैसे दे दिए। हफ्ते भर बाद दोस्तों से उन्हें पता चला कि उनकी गाड़ी के टैंक की कुल कपैसिटी 35 लीटर है। कार कंपनी से पेट्रोल टैंक की कपैसिटी कन्फर्म करने के बाद शर्मा पेट्रोल पंप के मैनेजर के पास शिकायत करने पहुंचे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। शर्मा जी के पास पेट्रोल की रसीद नहीं थी।

पेट्रोल भरवाते वक्त आपके साथ भी कई बार ऐसा होता होगा। कई बार पता नहीं चलता होगा कि पेट्रोल कम दिया गया है। कभी सुविधाएं नहीं, तो कभी पेट्रोल भरने वाले पाइप में लीकेज। आमतौर पर हमें पता नहीं होता कि ऐसी दिक्कतों की शिकायत कहां की जाए। आइए आपको विस्तार से बताते हैं:

सतर्क रहें

- पेट्रोल भरवाने से पहले गाड़ी का इंजन बंद कर दें।

- पंप का मीटर चेक कर लें कि वह जीरो पर है कि नहीं। हालांकि ज्यादातर पंपों पर सेल्समैन खुद ही मीटर चेक करने को कहते हैं।

- मीटर पर पेट्रोल या डीजल का रेट भी डिस्प्ले किया जाता है। उसी के हिसाब से पेमेंट करें।

- चेक करें कि मीटर पर डिस्प्ले किया गया रेट, पंप के बोर्ड के रेट से मेल खाता है या नहीं।

- पेट्रोल भरवाने के बाद रसीद जरूर लें। याद रखें बिना रसीद के आपकी सुनवाई ठीक ढंग से नहीं हो पाएगी।

- पेट्रोल पंप पर अगर कोई कर्मचारी आपसे बदसलूकी करे, टैंक में पेट्रोल डालने वाले ट्यूब में लीकेज हो या फिर ऐसी ही कोई और दिक्कत हो तो मैनेजर से शिकायत करें। अगर मैनेजर मौजूद नहीं है तो कंप्लेंट बुक में एंट्री करें।

जानकारी जरूरी है

- किसी भी पेट्रोल पंप पर पीने का साफ पानी और टायरों में हवा भरने के लिए प्रेशर पंप का होना जरूरी है। इन दोनों सुविधाओं के लिए चार्ज नहीं किया जा सकता।

- ग्राहकों की सुविधा के लिए पेट्रोल पंप चलाने वाले खाने-पीने की दुकान, रिपेयर शॉप या फिर फोन बूथ जैसी एक्स्ट्रा सुविधा दे सकते हैं।

- पेट्रोल पंप पर फर्स्ट-एड बॉक्स और शिकायत-सुझाव पुस्तिका का होना जरूरी है।

-सभी पेट्रोल पंप मालिकों के लिए जरूरी है कि वे उपलब्ध स्टॉक की जानकारी के साथ-साथ प्रॉडक्ट्स की कीमतें भी डिस्प्ले करें।

- दिल्ली में पेट्रोल पंप आमतौर पर सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक खुलते हैं। हर पंप के लिए यह जरूरी है कि वे अपने वर्किंग आवर्स डिस्प्ले करें। सभी पेट्रोल पंपों पर संबंधित ऑयल कंपनी के अधिकारियों (एरिया मैनेजर आदि) के फोन नंबर डिस्प्ले होना जरूरी है।

- पंप में मिलने वाले प्रॉडक्ट्स की क्वॉलिटी के लिए सिर्फ पंप मालिक ही नहीं, तेल कंपनी भी जिम्मेदार है।

- पेट्रोल पंप के कर्मचारी आपसे यह नहीं कह सकते कि हमारे यहां सिर्फ प्रीमियम पेट्रोल/डीजल ही है।

कैसे करें मिलावट की जांच

- अगर पेट्रोल/डीजल में पानी की मिलावट का शक हो, तो पंप पर उपलब्ध 'वॉटर फाइंडिंग पेस्ट' यूज करें। वॉटर फाइंडिंग पेस्ट का रंग हरा होता है। इस पेस्ट को टैंक से पेट्रोल/डीजल नापने वाली रॉड के एक सिरे पर लगाकर टैंक की निचली सतह से टच करते हैं। चूंकि पानी पेट्रोल/डीजल से भारी होता है इसलिए टैंक की निचली सतह पर ही जमा होता है। रॉड के एक सिरे पर लगा पेस्ट पानी के संपर्क में आते ही गुलाबी हो जाता है। अगर मिलावट कन्फर्म हो जाए, तो पंप के मैनेजर और ऑयल कंपनी को सूचित करें।

- पेट्रोल में मिट्टी के तेल आदि की मिलावट चेक करने का सबसे आसान तरीका है फिल्टर पेपर टेस्ट। यह पेपर सभी पंपों पर होता है। फिल्टर पेपर पर एक बूंद पेट्रोल नॉजल से डालें। अगर दो मिनट में पेट्रोल उड़ जाता है और कोई धब्बा नहीं उभरता, तो कोई मिलावट नहीं है। पेट्रोल उड़ने के बाद अगर गुलाबी रंग के अलावा कोई और धब्बा रह जाता है, तो मिलावट है।

- पेट्रोल/डीजल की मात्रा चेक करने के लिए पेट्रोल पंप पर पांच लीटर का यंत्र होना जरूरी है। इस पर राज्य सरकार के माप-तौल विभाग की सील लगी होनी चाहिए।

- शक होने पर आप पेट्रोल/डीजल की मात्रा चेक कराने के लिए कह सकते हैं।

ऐसे चेक करें पेट्रोल पंप

जिस पेट्रोल पंप से आप पेट्रोल लेते हैं, उसे चेक करने का एक तरीका है। इसके लिए सबसे पहले ऐसा पंप चुनें, जहां 'ऑटो कट ऑफ नॉजल' हो। अपनी गाड़ी का टैंक फुल कराएं और जैसे ही ऑटो कट ऑफ हो, सप्लाई रोक दें। टैंक में जबर्दस्ती तेल न डलवाएं। अब अपनी गाड़ी की मीटर रीडिंग नोट कर लें। कुछ दिन बाद फिर उसी पंप से ऑटो कट ऑफ टैंक फुल कराएं। मसलन पिछले समय आपकी मीटर रीडिंग 5000 थीऔर अब 5500 है। इस बार के ऑटो कट ऑफ में 30 लीटर तेल आया, तो 500 को 30 से भाग करें। इससे आपकी गाड़ी का ऐवरेज 16.66 किमी/लीटर आता है। इस तरह यही प्रक्रिया दूसरे पंप पर भी आजमाएं। जिसका ऐवरेज बेहतर आए, वहीं से तेल डलवाएं।

कहां और कैसे करें शिकायत (हेल्पलाइन)

अगर आपको पेट्रोल की क्वॉलिटी, सर्विस या फिर सेल्समैन के बर्ताव से संबंधित किसी भी पॉइंट पर दिक्कत आती है, तो सबसे पहले पंप मैनेजर से शिकायत करें या फिर कंप्लेंट बुक में लिखें। बात न बने तो फिर आजमाएं ये तरीके :

इंडियन ऑयल और आईबीपी

- इंडियन ऑयल और आईबीपी के ग्राहक इस टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज करवाएं : 18002333555 (यह लाइन सातों दिन और 24 घंटे काम करती है)। खत लिखकर या फोन से यहां भी की जा सकती है शिकायत : चीफ डिविजनल मैनेजर, रिटेल सेल्स (दिल्ली डिविजन), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, बाबर रोड, नई दिल्ली-110001, फैक्स : 011-23414861, फोन : 11-23411545 - वेबसाइट पर जाकर भी दर्ज कर सकते हैं शिकायत : www.iocl.com पर 'राइट टु अस' ऑप्शन पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करें।

हिंदुस्तान पेट्रोलियम

हिंदुस्तान पेट्रोलियम के उपभोक्ता इस टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें : 60506050 (यह लाइन सातों दिन और 24 घंटे काम करती है।)

- यहां भी की जा सकती है शिकायत : चीफ रीजनल मैनेजर, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, दिल्ली रिटेल ऑफिस, सातवीं मंजिल, स्कोप मीनार, लक्ष्मी नगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर, दिल्ली-110092, फैक्स: 011-22010616, फोन: 22010615

वेबसाइट : www.hindustanpetroleum.com

वेबसाइट के 'रिटेल' ऑप्शन में जाकर 'राइट टु अस' में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

भारत पेट्रोलियम

- भारत पेट्रोलियम के ग्राहक इस टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें : 1800222725 (यह लाइन सातों दिन और 24 घंटे काम करती है)

- यहां भी की जा सकती है शिकायत : सीनियर मैनेजर (जन शिकायत), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, बिजवासन, नई दिल्ली-110061

फोन : 011-28062163/28063416

वेबसाइट : www.bharatpetroleum.com

इस पर कंप्लेंट/फीडबैक ऑप्शन में जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

कॉमन हेल्पलाइन नंबर : किसी भी पेट्रोल कंपनी के ग्राहक कहीं से भी टोल-फ्री नंबर 155233 डायल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

फिर भी न बने बात तो

अगर आप ऑयल कंपनी की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं, तो पेट्रोलियम मंत्री या सचिव, भारत सरकार को इस पते पर लिखें : जन शिकायत, पेट्रोलियम मंत्रालय, जी-18, शास्त्री भवन, नई दिल्ली-110001

वेबसाइट : www.pgportal.gov.in


कौन सी कंपनियां देती हैं तेल

पब्लिक सेक्टर में चार तेल कंपनियां हैं : इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और इंडियन ब्रिटिश पेट्रोलियम (आईबीपी)। आईबीपी का अधिग्रहण इंडियन ऑयल ने कर लिया है। इस साल के आखिर तक आईबीपी के सभी पेट्रोल पंपों पर इंडियन ऑयल के बोर्ड नजर आएंगे।