गुरुवार, 2 सितंबर 2010

पेट्रोल पंप का पंगा

मिंटो रोड पर रहने वाले सतेंद्र शर्मा अपनी नई गाड़ी लेकर कनॉट प्लेस के पेट्रोल पंप पहुंचे। उन्होंने टैंक फुल करने को कहा और मीटर के हिसाब
से 40 लीटर पेट्रोल के पैसे दे दिए। हफ्ते भर बाद दोस्तों से उन्हें पता चला कि उनकी गाड़ी के टैंक की कुल कपैसिटी 35 लीटर है। कार कंपनी से पेट्रोल टैंक की कपैसिटी कन्फर्म करने के बाद शर्मा पेट्रोल पंप के मैनेजर के पास शिकायत करने पहुंचे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। शर्मा जी के पास पेट्रोल की रसीद नहीं थी।

पेट्रोल भरवाते वक्त आपके साथ भी कई बार ऐसा होता होगा। कई बार पता नहीं चलता होगा कि पेट्रोल कम दिया गया है। कभी सुविधाएं नहीं, तो कभी पेट्रोल भरने वाले पाइप में लीकेज। आमतौर पर हमें पता नहीं होता कि ऐसी दिक्कतों की शिकायत कहां की जाए। आइए आपको विस्तार से बताते हैं:

सतर्क रहें

- पेट्रोल भरवाने से पहले गाड़ी का इंजन बंद कर दें।

- पंप का मीटर चेक कर लें कि वह जीरो पर है कि नहीं। हालांकि ज्यादातर पंपों पर सेल्समैन खुद ही मीटर चेक करने को कहते हैं।

- मीटर पर पेट्रोल या डीजल का रेट भी डिस्प्ले किया जाता है। उसी के हिसाब से पेमेंट करें।

- चेक करें कि मीटर पर डिस्प्ले किया गया रेट, पंप के बोर्ड के रेट से मेल खाता है या नहीं।

- पेट्रोल भरवाने के बाद रसीद जरूर लें। याद रखें बिना रसीद के आपकी सुनवाई ठीक ढंग से नहीं हो पाएगी।

- पेट्रोल पंप पर अगर कोई कर्मचारी आपसे बदसलूकी करे, टैंक में पेट्रोल डालने वाले ट्यूब में लीकेज हो या फिर ऐसी ही कोई और दिक्कत हो तो मैनेजर से शिकायत करें। अगर मैनेजर मौजूद नहीं है तो कंप्लेंट बुक में एंट्री करें।

जानकारी जरूरी है

- किसी भी पेट्रोल पंप पर पीने का साफ पानी और टायरों में हवा भरने के लिए प्रेशर पंप का होना जरूरी है। इन दोनों सुविधाओं के लिए चार्ज नहीं किया जा सकता।

- ग्राहकों की सुविधा के लिए पेट्रोल पंप चलाने वाले खाने-पीने की दुकान, रिपेयर शॉप या फिर फोन बूथ जैसी एक्स्ट्रा सुविधा दे सकते हैं।

- पेट्रोल पंप पर फर्स्ट-एड बॉक्स और शिकायत-सुझाव पुस्तिका का होना जरूरी है।

-सभी पेट्रोल पंप मालिकों के लिए जरूरी है कि वे उपलब्ध स्टॉक की जानकारी के साथ-साथ प्रॉडक्ट्स की कीमतें भी डिस्प्ले करें।

- दिल्ली में पेट्रोल पंप आमतौर पर सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक खुलते हैं। हर पंप के लिए यह जरूरी है कि वे अपने वर्किंग आवर्स डिस्प्ले करें। सभी पेट्रोल पंपों पर संबंधित ऑयल कंपनी के अधिकारियों (एरिया मैनेजर आदि) के फोन नंबर डिस्प्ले होना जरूरी है।

- पंप में मिलने वाले प्रॉडक्ट्स की क्वॉलिटी के लिए सिर्फ पंप मालिक ही नहीं, तेल कंपनी भी जिम्मेदार है।

- पेट्रोल पंप के कर्मचारी आपसे यह नहीं कह सकते कि हमारे यहां सिर्फ प्रीमियम पेट्रोल/डीजल ही है।

कैसे करें मिलावट की जांच

- अगर पेट्रोल/डीजल में पानी की मिलावट का शक हो, तो पंप पर उपलब्ध 'वॉटर फाइंडिंग पेस्ट' यूज करें। वॉटर फाइंडिंग पेस्ट का रंग हरा होता है। इस पेस्ट को टैंक से पेट्रोल/डीजल नापने वाली रॉड के एक सिरे पर लगाकर टैंक की निचली सतह से टच करते हैं। चूंकि पानी पेट्रोल/डीजल से भारी होता है इसलिए टैंक की निचली सतह पर ही जमा होता है। रॉड के एक सिरे पर लगा पेस्ट पानी के संपर्क में आते ही गुलाबी हो जाता है। अगर मिलावट कन्फर्म हो जाए, तो पंप के मैनेजर और ऑयल कंपनी को सूचित करें।

- पेट्रोल में मिट्टी के तेल आदि की मिलावट चेक करने का सबसे आसान तरीका है फिल्टर पेपर टेस्ट। यह पेपर सभी पंपों पर होता है। फिल्टर पेपर पर एक बूंद पेट्रोल नॉजल से डालें। अगर दो मिनट में पेट्रोल उड़ जाता है और कोई धब्बा नहीं उभरता, तो कोई मिलावट नहीं है। पेट्रोल उड़ने के बाद अगर गुलाबी रंग के अलावा कोई और धब्बा रह जाता है, तो मिलावट है।

- पेट्रोल/डीजल की मात्रा चेक करने के लिए पेट्रोल पंप पर पांच लीटर का यंत्र होना जरूरी है। इस पर राज्य सरकार के माप-तौल विभाग की सील लगी होनी चाहिए।

- शक होने पर आप पेट्रोल/डीजल की मात्रा चेक कराने के लिए कह सकते हैं।

ऐसे चेक करें पेट्रोल पंप

जिस पेट्रोल पंप से आप पेट्रोल लेते हैं, उसे चेक करने का एक तरीका है। इसके लिए सबसे पहले ऐसा पंप चुनें, जहां 'ऑटो कट ऑफ नॉजल' हो। अपनी गाड़ी का टैंक फुल कराएं और जैसे ही ऑटो कट ऑफ हो, सप्लाई रोक दें। टैंक में जबर्दस्ती तेल न डलवाएं। अब अपनी गाड़ी की मीटर रीडिंग नोट कर लें। कुछ दिन बाद फिर उसी पंप से ऑटो कट ऑफ टैंक फुल कराएं। मसलन पिछले समय आपकी मीटर रीडिंग 5000 थीऔर अब 5500 है। इस बार के ऑटो कट ऑफ में 30 लीटर तेल आया, तो 500 को 30 से भाग करें। इससे आपकी गाड़ी का ऐवरेज 16.66 किमी/लीटर आता है। इस तरह यही प्रक्रिया दूसरे पंप पर भी आजमाएं। जिसका ऐवरेज बेहतर आए, वहीं से तेल डलवाएं।

कहां और कैसे करें शिकायत (हेल्पलाइन)

अगर आपको पेट्रोल की क्वॉलिटी, सर्विस या फिर सेल्समैन के बर्ताव से संबंधित किसी भी पॉइंट पर दिक्कत आती है, तो सबसे पहले पंप मैनेजर से शिकायत करें या फिर कंप्लेंट बुक में लिखें। बात न बने तो फिर आजमाएं ये तरीके :

इंडियन ऑयल और आईबीपी

- इंडियन ऑयल और आईबीपी के ग्राहक इस टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज करवाएं : 18002333555 (यह लाइन सातों दिन और 24 घंटे काम करती है)। खत लिखकर या फोन से यहां भी की जा सकती है शिकायत : चीफ डिविजनल मैनेजर, रिटेल सेल्स (दिल्ली डिविजन), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, बाबर रोड, नई दिल्ली-110001, फैक्स : 011-23414861, फोन : 11-23411545 - वेबसाइट पर जाकर भी दर्ज कर सकते हैं शिकायत : www.iocl.com पर 'राइट टु अस' ऑप्शन पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करें।

हिंदुस्तान पेट्रोलियम

हिंदुस्तान पेट्रोलियम के उपभोक्ता इस टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें : 60506050 (यह लाइन सातों दिन और 24 घंटे काम करती है।)

- यहां भी की जा सकती है शिकायत : चीफ रीजनल मैनेजर, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, दिल्ली रिटेल ऑफिस, सातवीं मंजिल, स्कोप मीनार, लक्ष्मी नगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर, दिल्ली-110092, फैक्स: 011-22010616, फोन: 22010615

वेबसाइट : www.hindustanpetroleum.com

वेबसाइट के 'रिटेल' ऑप्शन में जाकर 'राइट टु अस' में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

भारत पेट्रोलियम

- भारत पेट्रोलियम के ग्राहक इस टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें : 1800222725 (यह लाइन सातों दिन और 24 घंटे काम करती है)

- यहां भी की जा सकती है शिकायत : सीनियर मैनेजर (जन शिकायत), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, बिजवासन, नई दिल्ली-110061

फोन : 011-28062163/28063416

वेबसाइट : www.bharatpetroleum.com

इस पर कंप्लेंट/फीडबैक ऑप्शन में जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

कॉमन हेल्पलाइन नंबर : किसी भी पेट्रोल कंपनी के ग्राहक कहीं से भी टोल-फ्री नंबर 155233 डायल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

फिर भी न बने बात तो

अगर आप ऑयल कंपनी की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं, तो पेट्रोलियम मंत्री या सचिव, भारत सरकार को इस पते पर लिखें : जन शिकायत, पेट्रोलियम मंत्रालय, जी-18, शास्त्री भवन, नई दिल्ली-110001

वेबसाइट : www.pgportal.gov.in


कौन सी कंपनियां देती हैं तेल

पब्लिक सेक्टर में चार तेल कंपनियां हैं : इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और इंडियन ब्रिटिश पेट्रोलियम (आईबीपी)। आईबीपी का अधिग्रहण इंडियन ऑयल ने कर लिया है। इस साल के आखिर तक आईबीपी के सभी पेट्रोल पंपों पर इंडियन ऑयल के बोर्ड नजर आएंगे।

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