रविवार, 28 नवंबर 2010

मेट्रो में हुई पिटाई , पत्रकारों को लगी मिर्ची ?



अरे भाई इन जाबाजो को जो लेडिज कोच में अपनी बहादुरीके साथ उन के पल्लू से लिपटने की कोशिश में थे , जब इस नामुराद पुलिस ने उन्हें खीच कर लेडिज कोच से निकला और उन की उन के तरीके से जलील किया ,तो पत्रकार भड़क गए , ऐसा क्यों किया ? 
उन्हें तो प्यार से उतरना था , २०० रुपे की पर्ची आदर के साथ देनी चाहिए थी 

अब  आप लोग क्या कहेगे ,इस पत्रकारिता पर ?




11 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब लिखा , फोटो बढिया ली है

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  2. सैद्धान्तिक रूप में आजतक की बात सही है, लेकिन प्रैक्टीकल में नहीं..
    वैसे मध्य मार्ग यह था कि तगड़ा जुर्माना लगाया जाता और जो जुर्माना न दे पाता उसके ऊपर यह कार्रवाई की जाती...

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  3. @भारतीय नागरिक

    मतलब पैसो वालो को छुट है की वो जुरमाना भर कर लेडिज कोच में सफर कर सकते है ,या जुर्म का फैसला भी अमीरगरीब को देख कर होगा ,

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