बुधवार, 29 दिसंबर 2010

प्यार सा शेर प्यारी सी लड़की के लिए


अब तो आजा मेरे भोले क़ातिल,
तेरे बिन जीना भी दुश्वार हुआ,

चैन मिलता नही कही भी मुझे,
बाग बान भी आज खार हुआ,

क्या मोहब्बत इसी को कहते है,
एक पल जीना भी दुश्वार हुवा,

चला भी आए तू आज दिल की तड़प मेरी,
अमित का मरना भी दुश्वार हुआ.

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