मंगलवार, 31 मई 2011

अमित बन गया शायर-2


आखो मे अब न कोई सपना ,
दिल मे न कोई अपना ,
दर्द का अब अहसास नहीं ,
खुशी की कोई मुस्कराहट नहीं ,
जीने की कोई इच्छा ही नहीं ,
 क्यों जी रही हू पता ही नहीं

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