सोमवार, 2 मई 2011

अमित बन गया शायर-3



बेपनाह मोहब्बत की है मैंने ,
बेपंह गम पाया है मैंने ,
मोहब्बत की जिससे मैंने ,
यद् मर उसकी ,
डूबता तैरते पाया खुद को मैंने ,
समंदर बड़ा नमकीन था ,
आसुओ से बना था मेरे ,
 इसका मुझे यकीन था ............

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