शनिवार, 14 मई 2011

रागिनी एमएमएस: बोल्ड दृश्यों, गालियों की भरमार ragini mms

बॉलीवुड के साथ-साथ पूरे मीडिया में एकता कपूर निर्मित रागिनी एमएमएस को लेकर जो बाजार गर्म किया गया था उससे यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हो गई है। पूरे भारत में एक साथ प्रदर्शित हुई यह फिल्म अपने शुरूआती दो शो के रूझानों से यह साबित कर रही है कि लव सैक्स और धोखा की भांति एक बार फिर से बाजी एकता के हाथ में गई है। दिल्ली पब्लिक स्कूल की एक छात्रा दीपिका के साथ बीती घटना पर बनाई गई यह फिल्म सिर्फ और सिर्फ दर्शकों के साथ धोखा है।
इस फिल्म के लिए कहा जा रहा था कि यह सच्ची घटना पर आधारित है। लेकिन फिल्म देखने के बाद जाना कि यह बात हर पहलू से गलत साबित होती है। फिल्म में नायिका का जो चित्रण प्रस्तुत किया गया है वैसा कुछ नहीं हुआ था। वास्तविक घटना के अनुसार दीपिका नामक ल़डकी की उसके दोस्त ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर एक अश्लील फिल्म बनाई, जिसे उसने अपने समस्त दोस्तों को एमएमएस कर दिया था। यह मामला अभी कानून के विचाराधीन है। एकता ने सिर्फ यह एक चीज फिल्म में थो़डी देर के लिए दिखाई है, बाकी पूरी फिल्म को उन्होंने आत्मा के भरोसे छो़ड दिया है।
फिल्म की कहानी के मुताबिक एक नौजवान जो़डा वीक एंड पर जिन्दगी का लुत्फ लेने के लिए एक फार्म हाउस पर जाता है जहां नायक ने पहले से ही मकान में चौबीस कैमरे लगा रखे हैं जो नायक नायिका की हर हरकत को कैद करते हैं। फिल्म की शुरूआती रीलें इतनी ज्यादा अश्लील हैं कि इन्हें देखकर शर्म के मारे आंखें बंद हो जाती हैं और गर्दन स्वत: ही नीची हो जाती है। फिल्म में निर्देशक ने नायक के मुंह से इतनी गालियां बुलवाई हैं जिन्हें सुनकर और देखकर शर्मिन्दगी के साथ-साथ एक प्रश्न मन में उठता है कि क्या इस प्रकार की फिल्मों की सफलता के लिए दर्शक स्वयं जिम्मेदार नहीं हैं जो परदे पर पोर्न फिल्मों को देखना चाहता है। निर्देशक ने शुुरूआत में जो दृश्य दिखाये हैं उससे ऎसा लगता है जैसे हम किसी ब्ल्यू फिल्म की शुरूआत देख रहे हैं। ये दृश्य कामोत्तेजक व प्रणय का ऎसा चित्रण है जिसे सिनेमा हॉल में बैठी कुछ ल़डकियों ने ज्यों ही देखा वे तुरन्त उठकर बाहर चली गई। उनका कहना था कि क्या अब यही सब कुछ देखना हमारी मजबूरी है।
लव सैक्स और धोखा के बाद एकता कपूर ने एक नुस्खा अपने हाथ में ले लिया है वह यह कि अगर फिल्म में कोई स्टार नहीं है तो सैक्स को स्टार बनाया जाए। रागिनी एमएमएस में बोल्ड दृश्यों, गालियों और अपशब्दों की भरमार है। ये शायद इसलिए भी सेंसर बोर्ड की कैंची से बच गए कि आज देश और समाज का माहौल भी ऎसा ही हो चला है और इसे हम आज सेंसर बोर्ड की उदारता कह सकते हैं। हालांकि सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म पर अपनी कतरनी चलाई भी< है, उन दृश्यों और गीत को हटा दिया गया है जिसमें दिखाया गया था कि नायक और नायिका किस तरह से हमबिस्तर होते हुए अठखेलियां करते हैं। एक तरफ जहां इस तरह के दृश्य चल रहे होते हैं वहीं दूसरी तरफ एक आत्मा का किरदार भी पूरी फिल्म में है। एकता कपूर ने अश्लीलता को खौफ के आवरण में पेश किया है जो किसी भी कोण से दर्शक को प्रभावित नहीं करता है। फिल्म में जिस चु़डैल का जिक्र किया गया है उसके बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं है। यह चु़डैल कौन है, क्या चाहती है, नायक नायिका व उसके दोस्तों को क्यों सता रही है इसका कोई जिक्र नहीं है और फिल्म का अन्त भी अधूरा है। जिस नवयुवती दीपिका के जीवन पर यह फिल्म है उसका कहना है कि एकता कपूर ने उसकी जिन्दगी खराब कर दी है। मेरी जिन्दगी की व्यथा को अश्लील तरीके से परदे पर पेश किया गया है। एकता ने फिल्म में जो उत्तेजक सीन डाले हैं वह उसके जीवन से सम्बçन्ध्त नहीं हैं। एकता को मैंने अपनी लव लाइफ के बारे में कभी नहीं बताया।
निजी तौर पर हम समीक्षक के नाते जहां स्वयं को इस प्रकार की फिल्म देखने के लिए दोषी पाते हैं वहीं उन वितरकों को भी पूर्ण रूप से दोषी ठहराते हैं जो इस प्रकार की फिल्मों को खरीदते हैं और परदे पर पेश करते हैं। होना यह चाहिए कि वितरकों को इस प्रकार की फिल्मों से हाथ खींच लेना चाहिए। भारतीय समाज आधुनिकता की दौ़ड में हैं लेकिन क्या इस तरह की आधुनिकता हमें पसन्द है। बॉक्स ऑफिस पर इसका परिणाम निश्चित रूप से अच्छा होगा।  बॉलीवुड के साथ-साथ पूरे मीडिया में एकता कपूर निर्मित रागिनी एमएमएस को लेकर जो बाजार गर्म किया गया था उससे यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हो गई है। पूरे भारत में एक साथ प्रदर्शित हुई यह फिल्म अपने शुरूआती दो शो के रूझानों से यह साबित कर रही है कि लव सैक्स और धोखा की भांति एक बार फिर से बाजी एकता के हाथ में गई है। दिल्ली पब्लिक स्कूल की एक छात्रा दीपिका के साथ बीती घटना पर बनाई गई यह फिल्म सिर्फ और सिर्फ दर्शकों के साथ धोखा है।
इस फिल्म के लिए कहा जा रहा था कि यह सच्ची घटना पर आधारित है। लेकिन फिल्म देखने के बाद जाना कि यह बात हर पहलू से गलत साबित होती है। फिल्म में नायिका का जो चित्रण प्रस्तुत किया गया है वैसा कुछ नहीं हुआ था। वास्तविक घटना के अनुसार दीपिका नामक ल़डकी की उसके दोस्त ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर एक अश्लील फिल्म बनाई, जिसे उसने अपने समस्त दोस्तों को एमएमएस कर दिया था। यह मामला अभी कानून के विचाराधीन है। एकता ने सिर्फ यह एक चीज फिल्म में थो़डी देर के लिए दिखाई है, बाकी पूरी फिल्म को उन्होंने आत्मा के भरोसे छो़ड दिया है।
फिल्म की कहानी के मुताबिक एक नौजवान जो़डा वीक एंड पर जिन्दगी का लुत्फ लेने के लिए एक फार्म हाउस पर जाता है जहां नायक ने पहले से ही मकान में चौबीस कैमरे लगा रखे हैं जो नायक नायिका की हर हरकत को कैद करते हैं। फिल्म की शुरूआती रीलें इतनी ज्यादा अश्लील हैं कि इन्हें देखकर शर्म के मारे आंखें बंद हो जाती हैं और गर्दन स्वत: ही नीची हो जाती है। फिल्म में निर्देशक ने नायक के मुंह से इतनी गालियां बुलवाई हैं जिन्हें सुनकर और देखकर शर्मिन्दगी के साथ-साथ एक प्रश्न मन में उठता है कि क्या इस प्रकार की फिल्मों की सफलता के लिए दर्शक स्वयं जिम्मेदार नहीं हैं जो परदे पर पोर्न फिल्मों को देखना चाहता है। निर्देशक ने शुुरूआत में जो दृश्य दिखाये हैं उससे ऎसा लगता है जैसे हम किसी ब्ल्यू फिल्म की शुरूआत देख रहे हैं। ये दृश्य कामोत्तेजक व प्रणय का ऎसा चित्रण है जिसे सिनेमा हॉल में बैठी कुछ ल़डकियों ने ज्यों ही देखा वे तुरन्त उठकर बाहर चली गई। उनका कहना था कि क्या अब यही सब कुछ देखना हमारी मजबूरी है।
लव सैक्स और धोखा के बाद एकता कपूर ने एक नुस्खा अपने हाथ में ले लिया है वह यह कि अगर फिल्म में कोई स्टार नहीं है तो सैक्स को स्टार बनाया जाए। रागिनी एमएमएस में बोल्ड दृश्यों, गालियों और अपशब्दों की भरमार है। ये शायद इसलिए भी सेंसर बोर्ड की कैंची से बच गए कि आज देश और समाज का माहौल भी ऎसा ही हो चला है और इसे हम आज सेंसर बोर्ड की उदारता कह सकते हैं। हालांकि सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म पर अपनी कतरनी चलाई भी< है, उन दृश्यों और गीत को हटा दिया गया है जिसमें दिखाया गया था कि नायक और नायिका किस तरह से हमबिस्तर होते हुए अठखेलियां करते हैं। एक तरफ जहां इस तरह के दृश्य चल रहे होते हैं वहीं दूसरी तरफ एक आत्मा का किरदार भी पूरी फिल्म में है। एकता कपूर ने अश्लीलता को खौफ के आवरण में पेश किया है जो किसी भी कोण से दर्शक को प्रभावित नहीं करता है। फिल्म में जिस चु़डैल का जिक्र किया गया है उसके बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं है। यह चु़डैल कौन है, क्या चाहती है, नायक नायिका व उसके दोस्तों को क्यों सता रही है इसका कोई जिक्र नहीं है और फिल्म का अन्त भी अधूरा है। जिस नवयुवती दीपिका के जीवन पर यह फिल्म है उसका कहना है कि एकता कपूर ने उसकी जिन्दगी खराब कर दी है। मेरी जिन्दगी की व्यथा को अश्लील तरीके से परदे पर पेश किया गया है। एकता ने फिल्म में जो उत्तेजक सीन डाले हैं वह उसके जीवन से सम्बçन्ध्त नहीं हैं। एकता को मैंने अपनी लव लाइफ के बारे में कभी नहीं बताया।
निजी तौर पर हम समीक्षक के नाते जहां स्वयं को इस प्रकार की फिल्म देखने के लिए दोषी पाते हैं वहीं उन वितरकों को भी पूर्ण रूप से दोषी ठहराते हैं जो इस प्रकार की फिल्मों को खरीदते हैं और परदे पर पेश करते हैं। होना यह चाहिए कि वितरकों को इस प्रकार की फिल्मों से हाथ खींच लेना चाहिए। भारतीय समाज आधुनिकता की दौ़ड में हैं लेकिन क्या इस तरह की आधुनिकता हमें पसन्द है। बॉक्स ऑफिस पर इसका परिणाम निश्चित रूप से अच्छा होगा।  

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