रविवार, 31 जुलाई 2011

दो अक्षरो का जादू सा असर

सॉरी वास्तव में बहुत ही प्यारा शब्द है। हर रिश्ते में कभी न कभी मतभेद हो ही जाते हैं। बेहतर यह है कि रिश्तों में अहंकार हावी न होने दें। विवादों या लड़ाई-झगड़ से दूर रहने का एक आसान उपाय है अहंकार छोड़ देना और सॉरी बोलना सीख लेना। हालांकि सॉरी बोलना भी एक कला है जो हर किसी को नहीं आती। यह भी एक हुनर की तरह ही है जिसे आप जितना जल्दी हो सके, सीख लें। आपके दोस्तों, पति-पत्नी, बॉस, माता-पिता आदि से अपने संबंधों को बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी है।

अपनी ओर से विवादों को बढ़ने का मौका कभी नहीं देना चाहिए। रिश्ते में नाराजगी आने के बाद जीवन नरक की तरह लगने लगता है। कई बार हालात इस तरह के बन जाते हैं कि हम समझ नहीं पाते और संबंधों में कटुता बढ़ती चली जाती है लेकिन सॉरी बोलने से इसका समाधान किया जा सकता है।

लेकिन हमें पता ही नहीं होता कि सॉरी बोलें तो कैसे? सॉरी बोलने का सही तरीका आपके जीवन में आने वाली अनेक कठिनाइयों को दूर कर सकता है जिससे काफी हद तक रिश्तों में आई कड़वाहट कम हो सकती है। हम सॉरी बोलने से केवल इसलिए कतराते हैं कि कहीं हम गलत साबित न हो जाएं। लेकिन ऐसा नहीं है। जब हम सॉरी बोलते हैं तो वास्तव में हम महानता की और बढ़ते हैं।

हमें सॉरी इस तरह से कहनी चाहिए जिससे हमारे जीवनसाथी, दोस्त या रिश्तेदार को ऐसा लगे कि हम अपने किए पर वास्तव में शर्मिंदा हैं और हमें अपनी गलती का अहसास हो गया है। हम कई बार सॉरी बोलने में काफी असहजता महसूस करते हैं। लेकिन सॉरी बोलने से आत्मा तो पवित्र होती ही है, साथ ही मन की पीड़ा भी दूर हो जाती है।

आजकल के युवाओं में खासतौर से यह देखने को मिल रहा है कि वह अपनी गलती के लिए झट से सॉरी बोल देते हैं। जिससे उनके जीवन में अनेक खास पल पैदा हो जाते हैं। सॉरी बोलने के साथ आप अपने साथी या दोस्त को फूल या चॉकलेट देकर खुश कर सकते हैं।

देखने में आया है कि दोस्ती करने या विवादों का निपटारा करने के लिए कॉफी हाउस या रेस्तरां युवाओं की पहली पंसद बन गए हैं। अगर आपके लिए भी संबंधों से बढ़कर कुछ नहीं है तो सॉरी कहने में बिल्कुल भी देर न करें, क्योंकि रिश्तों से बढ़कर कुछ भी नहीं है। इंसान संबंधों को चलाने वाला प्राणी है।

जब संबंध ही न रहेंगे तो वह भी जानवर की ही जिंदगी जिएगा। इसलिए गलती किसी ने भी की हो, वजह चाहे जो भी हो, बीती बातों को भूलकर नई शुरुआत करनी चाहिए। यह शुरुआत करने के लिए सॉरी अपने आप में किसी जादू से कम नहीं है।

बुधवार, 27 जुलाई 2011

नजरिया -५

यूपीए का राज गजब है,लाचारी चहुंओर है
पी.एम एक भला है तो क्या,आधी कैबिनेट चोर है
मूर्छित पीएम सोच रहे हैं, ऐसी क्यूं किस्मत फूटी
जिसने पलकों पर बैठाया, जनता आज वही रूठी
सच्चाई और नेक इरादे था जिस पार्टी का नारा
आज उसी पार्टी का पीएम,है शागिर्दों से हारा
दाल में काला वाली बातें, अब न होती चरितार्थ हैं
अब काले में दाल पड़ी है, नेताओं का स्वार्थ है
गीता और रामायण के सब ज्ञान बहाए गंगे में
देशप्रेम-सौहार्द्र मिटाए, हिन्दु-मुसलिम दंगे में
राहुल बाबा गांव गली में स्वांग रचाकर घूम रहे हैं
दलितों के घर-घर जाकर, आंगन उनका चूम रहे हैं
महंगाई के दौर में चूल्हा, रोता सुबह-ओ-शाम है
दे पाया है कौन किसी को, सबके दाता राम हैं


गूगल बाबा से साभार 

मंगलवार, 26 जुलाई 2011

नजरिया-4

उजाला एक विश्वास है जो अँधेरे के किसी भी रूप के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल बजाने को तत्पर रहता है। ये हममें साहस और निडरता भरता है।