सोमवार, 25 जुलाई 2011

नजरिया-3

सुख का एक द्वार बंद होने पर दूसरा खुल जाता है, लेकिन कई बार हम बंद दरवाजे की तरफ इतनी देर तक ताकते रहते हैं कि जो द्वार हमारे लिए खुला है, उसे देख ही नहीं पाते।

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