शनिवार, 26 नवंबर 2011

ममता भरी माँ के लिए

अंधियारी रातों में मुझको
थपकी देकर कभी सुलाती
कभी प्यार से मुझे चूमती
कभी डाँटकर पास बुलाती

कभी आँख के आँसू मेरे
आँचल से पोंछा करती वो
सपनों के झूलों में अक्सर
धीरे-धीरे मुझे झुलाती

सब दुनिया से रूठ रपटकर
जब मैं बेमन से सो जाता
हौले से वो चादर खींचे
अपने सीने मुझे लगाती

रविवार, 20 नवंबर 2011

प्यार की आजमाइश

प्यार हर इंसान को आजमाता है,..
किसी से रूठ जाता है तो किसी पे मुस्कुराता है,......
प्यार का खेल ही ऐसा है,....
किसी का कुछ नहीं जाता तो किसी का सब कुछ लुट जाता है ..........

इन्तजार ?

रात सुबह का इंतजार नहीं करती ..
खुशबु मौसम का इंतजार नहीं करती..
जो भी ख़ुशी मिले उसको इंजॉय किया करो..
क्योकि जिन्दगी वक्त का इंतजार नहीं करती..

प्यार के लिए

डरपोक है वो लोग जो प्यार नहीं करते ..............
आखिर हौसला चाहिए बर्बाद होने के लिए.......".

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शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

दिल की बात -

अँधेरों से कब तक नहाते रहेंगे ।
हमें ख़्वाब कब तक ये आते रहेंगे ।

हमें पूछना सिर्फ़ इतना है कब तक,
वो सहरा में दरिया बहाते रहेंगे ।

ख़ुदा न करे गिर पड़े कोई, कब तक,
वे गढ्ढों पे चादर बिछाते रहेंगे ।

बहुत सब्र हममें अभी भी है बाक़ी,
हमें आप क्या आजमाते रहेंगे ।

कहा पेड़ ने आशियानों से कब तक,
ये तूफ़ान हमको मिटाते रहेंगे ।

गुरुवार, 10 नवंबर 2011

गजल -2

अपना दामन देख कर घबरा गए
ख़ून के छींटे कहाँ तक आ गए
भूल थी अपनी किसी क़ातिल को हम
देवता समझे थे,धोखा खा  गए
हर क़दम पर साथ हैं रुसवाइयां
हम तो अपने आप से शरमा गए
हम चले थे उनके आँसू पोंछने
अपनी आँखों में भी आँसू आ गए
साथ उनके मेरी दुनिया भी गयी
आह वो दुनिया से मेरी क्या गए
'अमित ' कभी  हम भी जाएँ
इस जहा को  छोड़ कर
जैसे ग़ालिब ,जोक जैसे  गए
और अपनी कहानी अमर कर गये

पुराणी याद -

उसके होंठों पर रही जो, वो हँसी अच्छी लगी
उससे जब नज़रें मिलीं थीं वो घड़ी अच्छी लगी
उसने जब हँसते हुए मुझसे कहा` तुम हो मेरे `
दिन गुलाबी हो गए ,ये ज़िन्दगी अच्छी लगी
पूछते हैं लोग मुझसे , उसमें ऐसा क्या है ख़ास
सच बताऊँ मुझको उसकी सादगी अच्छी लगी
कँपकँपाती उँगलियों से ख़त लिखा उसने "अमित "
जैसी भी थी वो लिखावट वो बड़ी अच्छी लगी