शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

दिल की बात -बेवफा सितमगर

सितम मेरे दिल पे वो यूँ ढाती  रही ,
रात भर वो बेवफा याद आता रही ,

ना हुआ  एहसास उससे किसी की तडप का,
यहाँ में शहर मे तन्हा ही चिल्लाता रहा,

सितम मेरे दिल पे वो यूँ ढाती रही …

चाहता था जिसे में खुद से भी ज़्यादा,
वो मूझे दर्द दे दे कर आज़माती रही,

लिखता रहा जिसे अपने खून से खत,
पता चला वो बिना पढ़े ही जलाती रहा,

सितम मेरे दिल पे वो यूँ ढाती रही …

“अमित ” जब उसके लौट आने की कोई उम्मीद  नही बाक़ी,
तो क्यू रात भर खुद को बहलाता रहा.

सितम मेरे दिल पे वो यूँ ढाती  रही …

गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

दिल की बात - यादे ताजा हो गई

    कुछ वक़्त तन्हाई में बिताया हमने तो, कुछ यादें ताज़ा हो गयी,

    राह में मिला तन्हा कोई साथी हमसे तो, कैसे मुझ से बेवफा हो गयी,

    दिल पर लिखा तन्हा जिसका नाम हमने बड़े प्यार से, कैसे रूह यु उससे जुदा  हो गयी,

    अब सोच कर हम रो तो पड़े हैं, मगर फिर सोचता हूँ अब बहुत देर हो गयी,

    कुछ वक़्त तो वो भी ठहरी  जहा  उस  मोड़ पर, जहाँ रूह बदन से जुदा  हो गयी.

बुधवार, 21 दिसंबर 2011

शायरी -रोते रोते

होंगे बदनाम तो हो लेने दो,
हमको जी खोल के रो लेने दो.

कोई लिख गया ,और किसी को याद रह गया

वो शाख-ए-गुल पे रहें या
किसी की अरथी पर
चमन के फूल तो आदी हैं मुस्कुराने के.

शायरी -डॉ बशीर बद्र की ,जो मुझे पसंद आई

कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी,
यों कोई बेवफ़ा नहीं होता।
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में,
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में।

दिल की बात - ना जाने किस का लिखा है , पर मुझे तो बड़ी जोर का लगा है

काश ऊपर वाले ने ये दिल काँच का बनाया होता .
तोङने वाले के हाथ में एक जख्म तो आया होता

मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

आखो का फिर भर आना

आज उसकी फिर याद आई है
,उस की बाते फिर  याद  कर फिर आखे भर आई  है ,
उस के साथ किये वादे तोड़े थे मैंने ,
ये बात रोज की तरह फिर मेरे दिल मे उठ आई है ,
ना जाने कैसे मै उस को अकेला छोड पाया था ,
अब तक इस बात को दिलको कभी मै नहीं समझा पाया ,
पर क्यों किया ये बात जरुर मै जन पाया ,
नाते रिश्ते करते है जब कभी हमे मजबूर ,
इसी तरह प्यार की डोर  हाथो से छुट  जाती है ,
आज फिर उसकी याद आई है ......................

दिल की बात -उसने मेरा खून किया

हंस रही है बेवफा मुझको रुला देने के बाद,
चैन उसको आया  आज आया दिल जला देने के बाद,
बेरहम ने खिलखिला के डोर यारों काट दी,
पतंग वो मेरे प्यार की
अम्बर से मिला देने के बाद,
होश में होता तो मेरी जान यूँ जाती नही,
खून मेरा उसने किया
मुझको सुला देने के बाद.........................

दिल की बात -उसका मुझ को सताना

ज़िंदगी इस कदर हमे सताती रही,
थोड़े शिकवे गिले और शिकायत रही,
मौत आती नही बस लुभाती रही,
ज़िंदगी इस कदर हमें सताती रही,,
मेरे अपने सब भी अब बेगाने लगे,
जबसे उनकी खुशी हमें रूलाती रही,
ज़िंदगी इस कदर हमें सताती रही............

दिल की बात - यार के लिए

यार के कंधे पे यार जा रहा है,
कफ़न से लिपटा संसार जा रहा है,
उससे मिली थी प्यार में बेवफ़ाई,
इसलिए  वफ़ा की तलाश में शमशान जा  रहा है..................

दिल की बात - रब्बा तकदीर बना

अपने दिल की बात हम उनसे कह नही सकते,

बिन कहे भी हम उनके बिन जी नही सकते,

मेरे रब्ब ऐसी तक़दीर बना की वो खुद आकर कहे,

“अमित ” हम आपके बिना एक पल भी रह नही सकते

दिल की बात -डर लगता है

चुप रहते है के कोई खफा ना हो जाए,

हमसे कोई रुसवा यूँ ही ना हो जाए,

बड़ी मुश्किल से कोई अपना लगने लगा है,

डरते है की मिलने से पहले ही कोई जुदा ना हो जाए.

दिल की बात - मेरा दाम तो लगा दे

हाज़िर हूँ तेरी कचहरी में कोई इल्ज़ाम तो लगा दे,

आशिक़ों की इस दुनिया में मेरा नाम तो बना दे,

हिमाकतें हो गयी दिल से मेरे नादान था वो,

बिक जाउगा  मोहब्बत में तेरी, मेरा दाम तो लगा दे.

दिल की बात -किस से क्या मागते

हम अपनी वफ़ाओं का सिला किस-किस से माँगते,
हम बे-वफ़ा  थे  फिर  वफ़ा किस से माँगते,
खुद ही तो की थी हम ने अपने इश्क  से बगावत ,
फिर हम जो दुवा माँगते तो किस से माँगते,
महबूब जो था वो भी तो नाराज़ था हम से,
कोई शोख अदा माँगते तो किस से माँगते,
जो वक़्त गुज़र जाए तो वापिस नही आता,
वो गया वक़्त माँगते तो किस से माँगते,
हम उस  की जुस्तजू  में हो गये  खुद से बेगाने,
हम घर का पता माँगते तो किस से माँगते.....................

सोमवार, 19 दिसंबर 2011

दिल की बात - ग़ालिब पहले ही कह गया

 


में ने क़िस्मत की लकीरों पेर यकीन करना छोड  दिया है “ग़ालिब “,

जो दिलों में बस जाएँ वो क़िस्मत की लकीरों में नही होते.



अब मेरी तरफ से ग़ालिब के लिए


ग़ालिब  को भी कभी प्यार हुआ होगा ,
उस की महबूबा का भी कभी इंकार हुआ होगा ,
 जभी जालिम की कलम से इतना दर्द निकला ,
ना जाने कोन हसीना होगी वो ,
जिसका जाने से ग़ालिब का जीना लिख लिख कर हराम हुआ होगा ...:)

दिल की बात - मै शर्त जीत जाता

किसी के प्यार को अब तक ना भुला और शायर बन गया
    हम ना जीत सकें वो ऐसी शर्त लगाने लगे,

    प्यारी सी आँखो को हमारी आँखो से लडाने लगे,

    जीत जातें हम उनसे पर पलक उन्होंने झपका ली,

    क्योकि  उनकी प्यारी सी आँखो में से आँसू आने लगे........................

दिल की बात -किस को बताऊ ?

अमित जैन
ना मिटा सका उसकी यादों को दिल से,

इसीलिए आज खुद को मिटा रहा हू,

प्यार करता था में कितना उससे,

आज उसको नही खुद को बता रहा हू .......................

दिल की बात- दिल का दर्द ,की क्या करू

सज़ा ऐसी मिली मुझ को, ज़ख़्म ऐसे लगे दिल पर,
छुपाता तो जिगर जाता, सुनाता तो बिखर जाता ,
अब मुझे कोई तो बताओ ,
उसके  जाने पर मै अपनों की कुटिल हँसी से कैसे है बच पाता .................................

दिल की बात - मै सब का अजीज हु

मालूम है बहोत चाहा है ज़माने ने हमको.

हम अज़ीज़ तो सबको हैं लेकिन,

सिर्फ़ ज़रूरत की तरह…..

दिल की बात -देख लो

दर्द सीने मैं छुपा है, दिखाया नही जाएगा,

मेरे गम  का किस्सा सुनाया नही जाएगा,

जी भर के देख लेना इस चेहरे को,

बार – बार कफ़न हटाया नही जाएगा....;


                                                           

दिल की बात -शिकायत

हमें  उनसे कोई रंज या कोई शिकायत नही,

शायद हमारी किस्मत में चाहत ही नही,

हमारी तक़दीर लिखकर मुकर गया वो रब्ब भी,

पूछा तो उसने भी जवाब दिया, यह मेरी लिखावट नही..............:


                                                                                            अमित जैन

दिल की बात -तन्हाई की तकदीर

    जब मैं डूबा तो समंदर को भी हैरत हुई मुझ पर,

    कितना अज़ीब तन्हा शख्स है किसी को पुकारता ही नहीं....


                                                                                                 अमित जैन

रविवार, 18 दिसंबर 2011

funny pic -हम और हमरी साइकिल करे रेल की सवारी ,बिन टिकेट के प्यारी

कुतिया ने किया आदमी से विवाह - शक है तो देख लो

लो जी रिश्ते तो स्वर्ग मे बनते है

funny pic - भारतीय रेलों मे खान पण का विशेष ध्यान रखा जाता है

सेवा का बढिया  तरीका

funny pic ये भारत मे ही संभव है


गुरुवार, 15 दिसंबर 2011

आज की कविता जो मुझे पसंद आई - लेखिका डॉ अनीता कपूर

आज समुन्दर को,
जाने
क्या ख़याल आया
चाँद से छुप कर
चाँदनी में नहा आया

मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

अन्ना हजारे -शरद पवार को पड़ा बस एक ही थप्पड़ ...

अब इस सब से क्या होगा ये तो आने वाला कल बताएगा ,पर एक बात तो साबित हो ही गई है की जनता की आवाज अब जो कान नहीं सुनेगे ,अब जनता उन कानो को इसी तरह से सुनाने के लिए आवाज से खोल देगी