शुक्रवार, 23 नवंबर 2012

विचारों कि अभिव्यक्ति


dil ki bhadas


शनिवार, 10 नवंबर 2012

शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

गुरुवार, 8 नवंबर 2012

जब दिल कभी कभी रोता है


बुधवार, 7 नवंबर 2012

जरुरत है वकील कि


रविवार, 4 नवंबर 2012

kasab ko dengu /कसाब को डेंगू


मुंबई आतंकी हमले का दोषी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब इन दिनों बुखार से पीड़ित है। जेल अधिकारियों को आशंका है कि कहीं उसे डेंगू न हो गया हो। अभी तक डेंगू की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस हाई प्रोफाइल मामले में अधिकारी किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहते।

पहचान जाहिर न करने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया, 'पिछले कुछ दिनों से कसाब के बुखार का इलाज हो रहा है। उसके डेंगू से पीड़ित होने की आशंका है। जेजे हॉस्पिटल के डॉक्टरों की एक टीम ने उसकी तीन बार जांच की। हम इस मामले में किसी तरह का रिस्क नहीं ले सकते।'

अधिकारी ने कहा, 'डॉक्टर भी कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहते। कसाब की तबियत पर लगातार नजर रखी जा रही है। उस पर मेडिसिन का असर हो रहा है।' गिरफ्तार किए जाने के बाद से कसाब को आर्थर रोड जेल के एक बम प्रूफ सेल में रखा गया है। उसकी सुरक्षा के मद्देनजर सारी सुविधाएं उसे जेल में ही मुहैया कराई जा रही है।
अब इस कुत्ते के लिए आप क्या कहेगे ?

shayri ladkiyo wali शायरी लड़कियों वाली


सेक्स वर्सेज़ इंटरनेट!

माना कि आज यंगस्टर्स को सबसे ज्यादा नशा इंटरनेट का है। लेकिन क्या साइबर वर्ल्ड में डुबकी लगाने के लिए वे सेक्स को भी दांव पर लगा सकते हैं? अगर हाल ही में आए सर्वे की मानें, तो बेशक इसका जवाब हां है। हाल ही में एक फॉरन लाइफस्टाइल मैगजीन ने यंगस्टर्स के बीच एक सर्वे किया। सेक्स वर्सेज़ इंटरनेट पर किए गए इस सर्वे में हैरान कर देने वाले नतीजे सामने आए। सर्वे में हिस्सा लेने वाले करीब 20 पर्सेंट यंगस्टर्स का जवाब था कि इंटरनेट की खातिर वे एक साल तक भी सेक्स से दूर रहने के लिए रेडी हैं।
इस सर्वे में हिस्सा लेने वाले 18 से 35 साल के यंगस्टर्स का कहना है कि उन्हें इंटरनेट का इतना जबर्दस्त अडिक्शन है कि उसके लिए वे लंबे अरसे तक सेक्स से दूर रहने के लिए भी राजी हैं। बेशक, इंटरनेट की इस दीवानगी के पीछे बड़ा हाथ सोशल नेटवर्किंग साइट्स का भी है। इस सर्वे में स्मार्टफोन रखने वाले 250 यंगस्टर्स ने हिस्सा लिया था। उनका कहना है कि उन्हें सोशल साइट्स सेक्स और सिगरेट के मुकाबले ज्यादा अट्रैक्ट करती हैं।

शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

KRVA CHOTH SPECIAL


करवाचोथ


हमे भी बोलने का मोका दो


mere dost ki kitab aane wali hai - hurre


एक नया दिन आएगा

गुरुवार, 1 नवंबर 2012

SACH KAHNE KI HIMMAT


सच्चाई का दम कब तक घोटोगे ?


सोमवार, 29 अक्तूबर 2012

सेक्सी मिसेज रूनझुन से वार्तालाप


साहब हम नुक्कड़ छोड़ कहीं आते जाते नही| पर मुसीबत है कि कोई न कोई बहाने से हमारे पास चली ही आती है। एन ऐसे एक बुरे दिन, हम चैन से गुजरती हुई सुंदरियो को निहारते खड़े ही थे। कि मिसेज रूनझुन जो कि शहर महिला मुक्ती मोर्चा की अध्यक्षा हैं, की नजर हम पर पड़ गयी। नजर तो हमारी भी उन पर पड़ गयी थी।  लेकिन साहब सुंदरियो को देखते ही हमारा दिमाग काम करना बंद कर देता है। नही तो हम पहले ही कट लिये रहते। खैर साहब मिसेज रूनझुन काफ़ी दिनो से हम पर खफ़ा थी। कोई उनका कान भर दिया था कि जैन साहब  महिलाओ को अत्याचारी बताने वाला लेख लिखते हैं। सो हम पर  चढ़ दौड़ी, बोलीं - "क्यों जैन साहब  आपको शर्म नही आती।  21 सदी में रहते हैं और महिलाओं के बारे में उल्टा सीधा लिखते हैं।" हमने कहा -"किस ने कहा आपसे, जरूर हमारे दुश्मनो की चाल है। हम तो महिलाओ की बड़ी इज्जत करते है। अब घर के कामो में पत्नी का हाथ बटाते हैंयही लिखते हैं। बस यही गुनाह है हमारा।"

मिसेज रूनझुन उलझन में पड़ गयी। पर उनकी खबर पक्की थी सो वे टस से मस नही हुईं।  कहने लगी- " नही हमें पक्की खबर है।  आप लोगो को सलाह देते हो कि पत्नी की इज्जत मत करो और खुद भी महिलाओ की  इज्जत नही करते।"


हमने कहा - "हम लोगो से कहते हैं कि पत्नी की जितनी इज्जत करनी चाहिये उतनी इज्जत कीजिये।"  मिसेज रूनझुन तमतमा उठीं- " जितनी इज्जत करनी चाहिये से क्या मतलब है आपका ?" हमने कहा - " अब मैडम आदमी औरत की जियादे ही इज्जत करने लगेगा तो दुनिया में बच्चे पैदा होना बंद नही हो जायेंगे। आप ही सोचिये कि कहीं इज्जत करना ज्यादा हो गया और पति ने  पत्नी को देवी मां बना लिया। फ़िर कैसा हाहाकार मच जायेगा दुनिया में।" मिसेज रूनझुन सकपका गयी बोली अच्छा इसे छॊड़िये ये बताईये दहेज प्रथा के बारे में आपका क्या विचार है। हमने कहा -"मैडम, अब ये बारे मे विचार वो लोग करते है जिनका शादी नही हुआ है। हम तो शादी शुदा हो हुआकर कबाड़ में पड़े हैं। लेकिन हमारी युवाओ को यही सलाह रहती है कि  बेटा भूले से दहेज नही लेना। वरना जिंदगी भर सुनना पड़ेगा कि फ़ला चीज मेरे पापा ने दी थी, आपसे तो खरीदी ही नही जाती।"


मिसज रूनझुन ने अगला सवाल दागा - "जैन साहब  एक्स्ट्रा मैरिटल अफ़ेयर के बारे में आप क्या सोचते है यह बताईये।"  हमने अमिताभ बच्चन की तरह कमर झटक कर कहा - "जिस को भी प्यार आये जब चाहे चली आये प्रेमनगर जैन साहब  की खोली नंबर 420।" मिसेज रूनझुन भड़क गयी - "क्या बकवास कर रहे हो आप जैन साहब ।"  हम भी भड़क गये -"और आप क्या कर रही है। कभी सोचा है आपने कि जिन महिलाओ के पति ऐसे संबंध बनाते है उन बेचारियो पर क्या गुजरती है। इस तरह की महिला विरोधी मुद्दो पर चर्चा हमें नही करनी। विवाह एक पवित्र बंधन है उस के अलावा कोई संबंध चर्चा के योग्य भी नही।" अब मिसेज रुनझुन ने हमे बड़े सम्मान की नजरो से देखा। वाह कैसा उम्दा किस्म का पति है। काश दुनिया के सभी पति ऐसे ही होते। फ़िर उन्होने कहा- "वाह  मान गये, बड़े अच्छे विचार हैं आपके। अच्छा ये बताईये कि बलात्कार के विषय में आप क्या सोचते हैं। हमने कहा- "मिसेज रूनझुन, सत्य यही है कि बलात्कार टल न सके तो उसका मजा लेना चाहिये।" मिसेज रूनझुन क्रोध से लाल हो गयी, हमको पीटती उसके पहले हमने सफ़ाई पेश कर दी - " दरअसल बात यह है कि नेता देश की जनता के साथ जो आर्थिक बलात्कार कर रहे हैं वो तो टाला नही जा सकता। जिसको चुनो वही भ्रष्टाचार में भिड़ जाता है। ऐसे में विकल्प ही क्या बचता है। सो हमारा विचार है कि जनता को इस आर्थिक बलात्कार का मजा लेना चाहिये।  कि वाह राजा साहब क्या स्टीक स्कैम किया था  आपने 2G में। या कलमाड़ी की हौसला अफ़जाई करनी चाहिये। कि वाह कामनवेल्थ की वेल्थ किस खूबसूरती से लूटी, लाजवाब खेला किया मजा आ गया। अधिकरियो से कहना चाहिये कि कि जरा प्रेम से लूटो भाई पैसा जाने का दर्द हो। लेकिन मीठा मीठा, हमे हर्ट बस मत करना ।

मिसेज रूनझुन भड़क गयी हम महिलाओ के उपर हो रहे अत्याचारो की बात कर रहे है। और आप कहां पहुंच गये। हमने समझाया - "आप कहां टिकी हो मैडम, जिस देश के आदमी ही व्यवस्था के गुलाम है। उनके हक ही नेताओ और अधिकारियों के चंगुल मे फ़ड़फ़ड़ा रहे हो। उस देश की औरतो की आजादी की बात करना ही बेमानी है। और आप हैं कि दिन भर व्यर्थ परेशान रहती है।"  फ़िर हमने बात घुमाई - वैसे मिसेज रूनझुन मानना पडेगा आपके पतिदेव को। हम इतनी सुंदर महिला के पति होते तो एक मिनट भी अकेला न छोड़ते अपनी श्रीमति को। मिसेज रूनझुन अभी तक महिला मुक्ती में ही अटकी हुई थी। गुस्से से बोली- "आप का मतलब है कि आदमी को अपनी बीबी को चौबीस घंटे कैद में रखना चाहिये।" हमने माथा ठोक कहा -"हम कहते क्या है और आप समझती क्या है। हमारा मतलब था कि जिसकी बीबी आपकी तरह  खूबसूरत हो। वो अपनी श्रीमती से एक पल की जुदाई भी कैसे बर्दाश्त कर सकता है भला।"

मिसेज रूनझुन शर्मा गयी - " आप तो हमे खामखा चने के झाड़ में चढ़ा रहे है। आदमी को कामधंधे पर जाना होता है कि नही। वो सब छोड़िये जैन साहब , यह बताईये कि हम महिला मुक्ती आंदोलन को कैसे आगे बढ़ायें।"
हमने सलाह दी - "बात ऐसी है मैडम, कि ये सब मुद्दे कीजिये साईड। इन सब से फ़ोकट बातचीत के अलावा कुछ होना जाना नही है। आज कल हाट मुद्दो का जमाना है। हेडलाईन देखिये और उस हिसाब से बिगुल बजाईये। जैसे उ जोहल हमीद का मामला हाट है, तो पिल जाईये बयान दीजिये। कि सिद्धार्त माल्या माफ़ी मांगे वरना उसके खिलाफ़ आंदोलन होगा। कुछ हेडलाईन न दिखे, तो ममता शर्मा टाईप "सेक्सी कहना गलत नही" बयान दे दीजिये। बवाल मच जायेगा और आप खुद ही हेड लाईन बन जायेंगी। नही तो कन्या भ्रूण हत्या या खाप पंचायत के पीछे लग लीजिये। टीवी शो में गला फ़ाड़िये। फ़िर देखिये कैसे आप महान बन जायेंगी फ़टाफ़ट।

प्रसन्न होमिसेज रूनझुन ने अगली समस्या बताई- "हमारे साथ महिलाये नही जुड़ती है। उसका उपाय बताईये कि कैसे उन्हे साथ लिया जाये। हमने कहा  -" आप भी न समझती नही हैं। देखिये आप पहले ही कितनी हसीन हैं। उपर से मेकअप कर लेती हैं। ऐसे में कौन महिला बदसूरत नजर आने आपके साथ नजर आना चाहेगी। सो थोड़ा टोन डाउन कीजिये, बिना मेकअप के रहिये उससे साथी महिलाएं भी खुश। हमारा  दर्द भी कुछ कम होगा, कि हाय हमें श्रीमती आपकी तरह खूबसूरत क्यों न मिली।


मिसेज रूनझुन शर्मा कर बोलीं - आप भी न  भईया बड़े मजाकिया है। चलिये अब मै चलती हूं। आईयेगा भाभी जी को लेकर कभी हमारे घर। हमारे हसबैंड को बड़ा अच्छा लगेगा आपसे मिल कर। इतना सुना साहब कि हमारा दिल टूट गया।  उपर से बगल में खड़े आसिफ़ भाई ने और टांट कस दिया कि -"जैन साहब  अल्लाह ने औरतो को आदमी पहचानने की गजब नेमत दी हुई है। लंपटो को वे तड़ से भाई बना लेती है। "

tumhari yaad me hum shyar ban gaye

kya ye saddi ka sach hai ?


dil ki baat -6

दिल कि तनहइयो से निकली एक बात

रविवार, 28 अक्तूबर 2012

dil ki baat -5


dil ki baat -4

दिल कि बात लिखने कि हिम्मत करते रहो

dil ki baat -3

दिल कि बात -3

शुक्रवार, 19 अक्तूबर 2012

दिल कि बात - एक सवाल dil ki baat - ek sawal

70 के दशक में आइस कैंडी बेचने वाला शख्स 5000 करोड़ का मालिक हो गया, स्कूटर पर चलने वाले ठेकेदार ने कई सौ करोड़ कमा कर अम्पायर बना लिया, पुणे में एक मामूली कारपोरेटर माँ के बेटे ने इतनी ज्ञात -अज्ञात संपत्ति हासिल कर ली की वह अकेले महाराष्ट्र का पांच साल का बजट संभल सकता है, बिहार से मुंबई गया पत्रकार एंटी बिहारी पार्टी से शुरू होकर करोड़ों का मालिक बन कहीं और शिफ्ट कर गया है ....... यह सब विदर्भ सहित महाराष्ट्र की हकीकतें हैं, ऐसी और कई कथाएँ हैं इस हकीकत में शामिल।



यह सब इतना सुनियोजित है की इसे एक्सपोज करना इतना आसान नहीं है। लेकिन केजरीवाल , चुकी जमीन की नहीं, मीडिया की राजनीति करते हैं, इसलिए उन्हें हडबडाहट थी की कच्चा -पक्का कुछ भी सही , सामने लाओ ताकि उन्हें और उनकी टीम को बी जे पी की बी टीम की छवि से मुक्ति मिले। इस प्रयास में वे जो कुछ लेकर आये, उससे जमीन पर बी जे पी को फायदा ही होना है। क्योंकि हकीकत है कि बीजेपी के लोगों ने ही विदर्भ के सिंचाई घोटाले को सामने लाया है। नीतिन गडकरी की कंपनी 'पूर्ती ' के एक डायरेक्टर माधव कोट्स्थाने ने नागपुर में एक जनहित याचिका भी दायर कर रखी है, 2011 से ही। कोट्स्थाने के द्वारा उपलब्ध कागजातों के आधार पर ही मैंने भी टाइम्स में रिपोर्टिंग की थी इस घोटाले की -2010 में. बीजेपी के लोग विधान सभा में इस मसले पर कई बार सवाल भी खड़े कर चुके हैं.

सिचाई परियोजनाओं से बड़ी कंपनियों को पानी दिए जाने के खिलाफ भी बी जे पी के लोग आवाज उठाते हैं, यह सब अक्सर स्थानीय अख़बारों में छपता रहता है। इसलिए इस आरोप से गडकरी का जमीन पर कुछ नहीं बिगड़ने वाला। गडकरी की छवि विदर्भ में बंद पड़े चीनी मील को शुरू कराने वाले नेता की है और महाराष्ट्र में नेताओं ने सहकारी संस्थाओं से ही अपनी संपत्ति अर्जित की है, वैसे में विवादित जमीन पर अपने सहकारी संस्थान से गडकरी यदि गन्ना के उन्नत सैम्पल तैयार करते हैं, तो यह आरोप भी जमीन पर गडकरी के खिलाफ बेअसर ही साबित होगा ।

केजरीवाल और उनकी पार्टी मुगालते में हैं कि बिना 'राजनीतिक दर्शन' के सिर्फ खोजी पत्रकारिता के खेल से अपनी पार्टी खड़ा कर ले जायेंगे। देखना यह है की यह मीडिया -पार्टी कब तक जीवित रह पाती है ....... प्राइम टाइम के बहसों में भी .......!!!

गुरुवार, 18 अक्तूबर 2012

dil ki baat दिल कि बात -18/10/12


सोमवार, 15 अक्तूबर 2012

ek baat jo dil se nikli एक बात जो दिल से निकली


दिल कि शायरी dil ki shayri


dil ki shayri दिल कि शायरी


6 सिलिंडर के बाद क्या होगा ?


एक सवाल केजरीवाल से

 एक सवाल केजरीवाल से ?

दिल के विचार


शुक्रवार, 21 सितंबर 2012

आज दिल को कुछ अच्छा लगा



आप सब के दिल कि बात ,जब कोई दिल को तोड़ दे

गुरुवार, 5 जुलाई 2012

dil ki baat -1


सोमवार, 18 जून 2012

DR AMIT JAIN -शार्प मेमोरी के लिए क्या करे ?

एग्जाम करीब आते ही दिमाग में बस पढ़ना और पढ़ना ही याद आता है। न दिन देखते हैं और न रात किताबों की दुनिया में खोए रहने का मन करता है। जो समझ में आया तो ठीक वरन्‌ उसे रट लिया। दिक्कत यह है कि तैयारी में महिनों लगाने के बाद भी कई बार नतीजा सिफर ही निकलता है। यानी एग्जाम हॉल में हाथ में पेपर आते ही दिमाग की बत्ती गुल हो जाती है। तैयारियों के दौरान जो कुछ भी पढ़ा उसकी बस धुंधली सी यादें ही दिमाग में घूमने लगती हैं बाकी बस काले अंधेरे में कहीं खो जाता है।

ऐसा किसी एक के साथ नहीं बल्कि ज्यादातर युवाओं के साथ होता है। इससे बचने के लिए ज्यादा विद्यार्थी बाजार में आ रही मेमोरी इंप्रूव की दवाइयां या बुद्धिवर्धक पेय का इस्तेमाल करते हैं। उनके मुताबिक इससे उनकी मेमोरी इंप्रूव होती है लेकिन जानकार मानते हैं कि मेमोरी को इंप्रूव करने के बजाए उसे स्ट्रांग बनाएं ताकि लंबे समय तक आप उसे अपने दिमाग में रख सकते हैं।

..तो ज्यादा देर रहेगा याद
मनोवैज्ञानिक के मुताबिक मेमोरी इंप्रूव करना और स्ट्रांग करना दो अलग- अलग बातें हैं। दवाएं खाकर कम समय में ज्यादा से ज्यादा याद करना संभव नहीं है लेकिन भरपूर पोषण और टेंशन फ्री रहकर दिमाग में स्टोर करने की क्षमता को विकसित किया जा सकता है। मेमोरी को इंप्रूव नहीं स्ट्रांग बनाने की जरूरत है। एक वक्त में कई तरह की बातें दिमाग में घूमने से हम भटकने लगते हैं और पिछला सबकुछ भूल जाते हैं। इससे बचने के लिए एक समय में एक ही काम करें। दस काम लेने से आपके सभी काम प्रभावित होंगे
योग बढ़ाता है ऑक्सीजन लेवल
योग और प्राणायाम की मदद से दिमाग की स्मरण शक्ति को ब़ढ़ाया जा सकता है। इसमें कुछ क्रियाएं हैं, जिनकी मदद से दिमाग में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाया जा सकता है।

स्टूडेंट्स की यही समस्या होती है कि वो याद तो कर लेता है लेकिन दिमाग में स्टोर नहीं कर पाता। तनाव और ऑक्सीजन लेवल की कमी के कारण याद किया हुआ रीकॉल नहीं हो पाता। इस समस्या के लिए योग का सहारा लें। योग ऑक्सीजन लेवल को बढाता है।

लें लंबी सांसें
एग्जाम देने के पूर्व लंबी-लंबी सांसें छोड़ें और लें। यह प्रकिया 20 से 30 मिनट बाद दोहराएं। इससे दिमाग में ऑक्सीजन का स्तर बना रहेगा और दिमाग के फंक्शन को तनाव से मुक्त रखा जा सकता है। अक्सर यह प्रक्रिया किसी भी तनाव से भरे कार्य को करने से पहले की जाती है।

इनका करें उपयोग

1. ॐ का उच्चारण करें

मुंह खोलकर लंबी सांस भरे और फिर ॐ का उच्चारण भी ऑक्सीजन पाने का बेहतरीन तरीका है।

2. भ्रामरी प्राणायाम भी है बेहतर

भ्रामरी प्राणायाम से ऐसे हार्मोंस निकलते हैं जो दिमाग को रिलेक्स करते हैं। इसके साथ ही भ्रामरी प्राणायाम दिमाग में जूझने की क्षमता को ब़ढ़ाता है।

3. एक ही काम पर लगाएं मन

एक वक्त पर एक ही काम करें। एक साथ कई काम करने से हमारा दिमाग स्थिर होने की बजाए तनाव से ग्रस्त हो जाता है। इस स्थिति से बचने की पूरी कोशिश करें।


सोमवार, 11 जून 2012

दिल का दर्द


रविवार, 10 जून 2012

आप क शुक्रिया - शायरी


जो निभा दे साथ जितना ,उस साथ का ही शुक्रिया ,
छोड दे जो बीच में ,उस हाथ का भी शुक्रिया ,
जब गरज उनकी पड़ी ,हर काम आये हम सदा ,
काम जब मेरा पडा ,साथ न निभाने का शुक्रिया !

गुरुवार, 7 जून 2012

तन्हाई की शायरी


बुधवार, 30 मई 2012

एक लाचारी ये भी है मेरे देश मे


                                   ओर सब मिल कर जोर से बोलो मेरा भारत महान

माता-पिता द्वारा बच्चियों की हत्या – बेटे की चाहत या आर्थिक विवशता



वैसे तो हम महिला सशक्तिकरण और उनके उत्थान की बातें करते नहीं थकते, लेकिन आजकल समाचार-पत्रों और न्यूज चैनलों में जो नवजात बच्चियों को उन्हीं के अभिभावकों द्वारा मौत के घाट उतारने जैसी शर्मनाक घटनाएं प्रसारित की जा रही हैं वह किसी भी व्यक्ति को भावुक कर सकती हैं और यह सोचने के लिए विवश कर सकती हैं कि हम इतने क्रूर और नृशंस समाज का हिस्सा कैसे हो सकते हैं जहां अपनी ही बच्ची को प्रताड़ना देते व मारते हुए माता-पिता एक बार भी नहीं सोचते?


बेबी आफरीन जिसे उसके पिता ने ही मार डाला, भूमि, जिसे ट्रेन में बेसहारा छोड़ते हुए उसके अभिभावकों ने एक बार भी नहीं सोचा कि अगर यह बच्ची गलत हाथों में चली गई तो इसके भविष्य का क्या होगा, सभी का कसूर बस इतना था कि वह लड़का नहीं लड़की थीं। दिल्ली, बंगलुरू, जोधपुर सहित देश के लगभग सभी बड़े शहरों का यही हाल है। हम महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देने की चाहे जितनी भी कोशिश कर लें लेकिन वर्तमान हालातों को देखते हुए तो हम इस बात से कतई इंकार नहीं कर सकते कि माता-पिता आज भी सिर्फ लड़के की ही चाह रखते हैं। फर्क केवल इतना है कि अब वह लड़की को बोझ समझकर उसका पालन-पोषण नहीं करते बल्कि जल्द से जल्द उसकी हत्या कर उससे छुटकारा पाना चाहते हैं। अस्पताल में भर्ती माताएं यह मानने को ही तैयार नहीं होतीं कि उन्होंने बेटी को जन्म दिया है। घर पर उस नवजात बच्ची पर अमानवीय जुल्म किए जाते हैं। इतना करने के बाद भी अगर उस बेकसूर बच्ची की सांसी नहीं टूटती तो उसे जला दिया जाता है या फिर किसी नाले में फेंक दिया जाता है और कारण बताया जाता है आर्थिक परेशानी !! बच्ची के हत्यारे अभिभावक यह दलील देते हैं कि उनके पास इतनी सामर्थ्य नहीं है कि वह बेटी का पालन-पोषण कर सकें। लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि जिस तरह बेटे को बड़ा किया जा सकता है क्या उसी सोच के साथ बेटी को जीवन जीने का हक नहीं दिया जा सकता?


वहीं इन सभी घटनाओं का एक चेहरा यह भी हो सकता है कि हमारे समाज का ताना-बना ही कुछ इस तरह से बनाया गया है जहां चाह कर भी ऐसे अभिभावक जिनके आर्थिक हालात ठीक नहीं हैं, घर में एक से अधिक या कभी-कभार एक बेटी का पालन भी नहीं कर पाते। शिक्षा ग्रहण करने के बाद दूसरे के घर चले जाना और उसके ससुराल पक्ष के प्रति आजीवन ऋणी रहने जैसे हालात अभिभावकों को बेटी का बोझ उठाने नहीं देते। महिलाओं के प्रति दिनोंदिन बढ़ रही आपराधिक वारदातें भी माता-पिता की चिंता का एक बड़ा कारण हैं।


उपरोक्त चर्चा के आधार पर कुछ गंभीर सवाल उठते हैं, जिन पर विचार किया जाना नितांत आवश्यक है, जैसे:

1. क्या समय बदलने के बावजूद घर में लड़की का होना बोझ ही माना जाएगा?


2. जिस तरह एक बेटे का पालन-पोषण किया जाता है, क्या अभिभावक उसी तरह अपनी बेटी की परवाह नहीं कर सकते?


3. क्या आर्थिक हालातों का हवाला देकर एक नवजात बच्ची से उसके जीने का अधिकार छीन लेना अमानवीय नहीं है?


4. आज जब महिलाओं को भी अपनी प्रगति और उन्नति के समान अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं तो ऐसे में उनके साथ होता भेदभाव कहां तक सहन किया जा सकता है?


मंगलवार, 29 मई 2012

मेरे पास आरक्षण है

एक सुचना -कुवारों के हित मे जारी की गई है ,ध्यान से पढ़ ले


ये सुचना कुवारों के हित मे देश भर मे अमित जैन जी की तरफ से जारी की गई है ,किर्पया इसे ध्यान से पढ़ ले ,अन्यथा आप को लेने के देने भी पड़ सकते है

अपनी तकदीर को कोसने के सिवा - शायरी

अपनी तकदीर को कोसने के सिवा ,
काश तूने उससे प्यार जताया होता ,
उसकी तरफ मोहब्बत से देखा होता,
उसको देख कर तू मुस्कुराया होता,
खुशी बाँटो तो खुशी मिलती है "अमित  ",
काश ये बात किसी ने तुझे बताया होता

दिल की बात - शायरी


शनिवार, 26 मई 2012

शायरी -दिल की बात