मंगलवार, 21 जनवरी 2014

shayarशायर १९/१/१४ (३)

अपने पराये का भेद
बचपन मे ना सीख पाए
समझा अपना सभी को
अब आके अपने भी पराए पाए
महत्वकांक्षा उनकी पैसो की
जब ना कर पाए पूरी
अपनों ने वो जुल्म ढाए
देख देख गैर भी शर्माए

अमित (दुनिया का सच देखा हमने ,जब ये जाना ,पैसो के लिए मर मिटे ,अपना हो या बेगाना

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